Correct Answer:
Option C - फ्लैशर लाइट में एक्चुएटिंग वायर और सोलोनायड क्वॉयल की सहायता से ली जाती है।
फ्लैशर लाइट– इसे टर्न सिग्नल (ब्लिकर लाइट) भी कहते हैं। जब कभी गाड़ी को टर्न किया जाता है, तब अन्य गाड़ी वाले को संकेत देने हेतु टर्न सिग्नल लाइट का प्रयोग किया जाता है। ये सिग्नल बत्तियाँ छोटे वंâट्रोल द्वारा चलित होते हैं। जिन्हें स्टीयरिंग व्हील के नीचे स्टीयरिंग कालम के हाउसिंग में दाएँ या बाएँ तरफ माउण्ट किया जाता है। जब दायीं तरफ मुड़ना होता है तो लीवर को ऊपर पुश करके दायीं मोड़ की सिग्नल दी जाती है तथा लीवर को नीचे धकेलकर बायीं ओर की सिग्नल दी जाती है।
C. फ्लैशर लाइट में एक्चुएटिंग वायर और सोलोनायड क्वॉयल की सहायता से ली जाती है।
फ्लैशर लाइट– इसे टर्न सिग्नल (ब्लिकर लाइट) भी कहते हैं। जब कभी गाड़ी को टर्न किया जाता है, तब अन्य गाड़ी वाले को संकेत देने हेतु टर्न सिग्नल लाइट का प्रयोग किया जाता है। ये सिग्नल बत्तियाँ छोटे वंâट्रोल द्वारा चलित होते हैं। जिन्हें स्टीयरिंग व्हील के नीचे स्टीयरिंग कालम के हाउसिंग में दाएँ या बाएँ तरफ माउण्ट किया जाता है। जब दायीं तरफ मुड़ना होता है तो लीवर को ऊपर पुश करके दायीं मोड़ की सिग्नल दी जाती है तथा लीवर को नीचे धकेलकर बायीं ओर की सिग्नल दी जाती है।