Correct Answer:
Option C - वाराणसी, राजगृह, कौशाम्बी, श्रावस्ती, वैशाली, चम्पा, अयोध्या (साकेत) इत्यादि नगरों का सम्बंध बुद्ध के जीवन से है, बुद्ध काल तक पाटलिपुत्र का विकास अभी नहीं हो पाया था। बुद्ध के काल में मगध की राजधानी गिरीव्रज (राजगृह) एवं कौशल की राजधानी श्रावस्ती थी। वत्स जनपद की राजधानी कौशाम्बी में भी बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार हुआ और अनेक बौद्ध विहार बने। श्रावस्ती में बुद्ध ने सर्वाधिक उपदेश दिए, इसके अतिरिक्त कौशल का अन्य नगर साकेत भी बुद्ध के जीवन काल में विद्यमान था। यद्यपि गांधार एवं अवन्ति महाजनपद बुद्ध काल में विद्यमान थे, परन्तु बुद्ध के जीवन से प्रत्यक्षत: संबंधित नहीं थे। बुद्ध ने अवन्ति की राजधानी उज्जयनि में धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए स्वयं न जाकर महाकच्चायन नामक अपने शिष्य को भेजा था। बौद्ध ग्रंथ महापरिनिर्वाणसुत्त से ज्ञात होता है कि उत्तर भारत में 60 नगर थे जिनमें से चम्पा, राजगृह श्रावस्ती, साकेत (अयोध्या), कौशाम्बी तथा वाराणसी महानगर थे।
C. वाराणसी, राजगृह, कौशाम्बी, श्रावस्ती, वैशाली, चम्पा, अयोध्या (साकेत) इत्यादि नगरों का सम्बंध बुद्ध के जीवन से है, बुद्ध काल तक पाटलिपुत्र का विकास अभी नहीं हो पाया था। बुद्ध के काल में मगध की राजधानी गिरीव्रज (राजगृह) एवं कौशल की राजधानी श्रावस्ती थी। वत्स जनपद की राजधानी कौशाम्बी में भी बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार हुआ और अनेक बौद्ध विहार बने। श्रावस्ती में बुद्ध ने सर्वाधिक उपदेश दिए, इसके अतिरिक्त कौशल का अन्य नगर साकेत भी बुद्ध के जीवन काल में विद्यमान था। यद्यपि गांधार एवं अवन्ति महाजनपद बुद्ध काल में विद्यमान थे, परन्तु बुद्ध के जीवन से प्रत्यक्षत: संबंधित नहीं थे। बुद्ध ने अवन्ति की राजधानी उज्जयनि में धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए स्वयं न जाकर महाकच्चायन नामक अपने शिष्य को भेजा था। बौद्ध ग्रंथ महापरिनिर्वाणसुत्त से ज्ञात होता है कि उत्तर भारत में 60 नगर थे जिनमें से चम्पा, राजगृह श्रावस्ती, साकेत (अयोध्या), कौशाम्बी तथा वाराणसी महानगर थे।