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Q: Which of the following Acts introduced ‘the Principle of Constitutional Autocracy’? निम्नलिखित में से किस अधिनियम द्वारा ‘संवैधानिक निरंकुशता का सिद्धान्त’ प्रवृत्त किया गया?
  • A. The Indian Councils Act of 1909 1909 का भारतीय काउंसिल अधिनियम
  • B. The Government of India Act of 1919 1919 का भारत सरकार अधिनियम
  • C. The Government of India Act of 1935 1935 का भारत सरकार अधिनियम
  • D. The Indian Independence Act of 1947 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम
Correct Answer: Option C - 1. इस एक्ट के द्वारा पहली बार एक अखिल भारतीय संघ (संघात्मक सरकार) की स्थापना का प्रयास किया गया। 2. इस अधिनियम के तहत केंद्र तथा प्रान्तों के बीच तीन सूचियों संघीय सूची (59 विषय), राज्य सूची (54 विषय) एवं समवर्ती सूची (दोनों के लिए 36 विषय) के आधार पर शक्तियों का बंटवारा किया गया। अवशिष्ट शक्तियाँ वायसराय (गवर्नर जनरल) को दी गयी। 3. प्रांतीय स्तर पर द्वैध शासन को समाप्त कर दिया गया जिसका उद्देश्य प्रांतीय स्वायत्तता को बढ़ावा देना था। लेकिन अब केंद्र स्तर पर द्वैध शासन प्रणाली स्थापित की गयी। इस अधिनियम के तहत राज्यों में उत्तरदायी सरकार की स्थापना का प्रावधान किया गया। 4. दलितों, महिलाओं और मजदूर वर्ग के लिए अलग से निर्वाचन की व्यवस्था कर सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का विस्तार किया गया। 5. इस एक्ट के तहत संघीय न्यायालय (1937) की स्थापना की गयी, संघीय न्यायालय के निर्णय के खिलाफ अपील प्रिवी कौंसिल में की जा सकती थी। 6. इस अधिनियम के तहत संघीय लोक सेवा आयोग की स्थापना की गयी, साथ ही प्रांतीय सेवा आयोग और दो या अधिक राज्यों के लिए संयुक्त सेवा आयोग की स्थापना भी की गयी। 7. इसके तहत एक केंद्रीय बैंक की स्थापना की गयी तथा बर्मा को भारत से पृथक कर दिया गया। 8. 6 प्रांतों में द्विसदनीय व्यवस्था प्रारम्भ की गयी-बंगाल, बम्बई, मद्रास, बिहार, संयुक्त प्रान्त व असम। 9. इस अधिनियम के अध्याय 5 में अपवर्जित क्षेत्र तथा आंशिक रूप से अपवर्जित क्षेत्र सम्बन्धी प्रावधान किये गए। • ज्ञातव्य है कि आजादी के बाद तथा भारत के संविधान के प्रवर्तन के बीच के काल में भारत सरकार भारत शासन अधिनियम, 1935 उपबंधों के अधीन कार्य करती रही। • वर्तमान संविधान में लगभग 250 से अधिक अनुच्छेद भारत शासन अधिनियम 1935 से लिए गए हैं। अत: इसे भारतीय संविधान का मूल आधार माना जाता है।
C. 1. इस एक्ट के द्वारा पहली बार एक अखिल भारतीय संघ (संघात्मक सरकार) की स्थापना का प्रयास किया गया। 2. इस अधिनियम के तहत केंद्र तथा प्रान्तों के बीच तीन सूचियों संघीय सूची (59 विषय), राज्य सूची (54 विषय) एवं समवर्ती सूची (दोनों के लिए 36 विषय) के आधार पर शक्तियों का बंटवारा किया गया। अवशिष्ट शक्तियाँ वायसराय (गवर्नर जनरल) को दी गयी। 3. प्रांतीय स्तर पर द्वैध शासन को समाप्त कर दिया गया जिसका उद्देश्य प्रांतीय स्वायत्तता को बढ़ावा देना था। लेकिन अब केंद्र स्तर पर द्वैध शासन प्रणाली स्थापित की गयी। इस अधिनियम के तहत राज्यों में उत्तरदायी सरकार की स्थापना का प्रावधान किया गया। 4. दलितों, महिलाओं और मजदूर वर्ग के लिए अलग से निर्वाचन की व्यवस्था कर सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का विस्तार किया गया। 5. इस एक्ट के तहत संघीय न्यायालय (1937) की स्थापना की गयी, संघीय न्यायालय के निर्णय के खिलाफ अपील प्रिवी कौंसिल में की जा सकती थी। 6. इस अधिनियम के तहत संघीय लोक सेवा आयोग की स्थापना की गयी, साथ ही प्रांतीय सेवा आयोग और दो या अधिक राज्यों के लिए संयुक्त सेवा आयोग की स्थापना भी की गयी। 7. इसके तहत एक केंद्रीय बैंक की स्थापना की गयी तथा बर्मा को भारत से पृथक कर दिया गया। 8. 6 प्रांतों में द्विसदनीय व्यवस्था प्रारम्भ की गयी-बंगाल, बम्बई, मद्रास, बिहार, संयुक्त प्रान्त व असम। 9. इस अधिनियम के अध्याय 5 में अपवर्जित क्षेत्र तथा आंशिक रूप से अपवर्जित क्षेत्र सम्बन्धी प्रावधान किये गए। • ज्ञातव्य है कि आजादी के बाद तथा भारत के संविधान के प्रवर्तन के बीच के काल में भारत सरकार भारत शासन अधिनियम, 1935 उपबंधों के अधीन कार्य करती रही। • वर्तमान संविधान में लगभग 250 से अधिक अनुच्छेद भारत शासन अधिनियम 1935 से लिए गए हैं। अत: इसे भारतीय संविधान का मूल आधार माना जाता है।

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1. इस एक्ट के द्वारा पहली बार एक अखिल भारतीय संघ (संघात्मक सरकार) की स्थापना का प्रयास किया गया। 2. इस अधिनियम के तहत केंद्र तथा प्रान्तों के बीच तीन सूचियों संघीय सूची (59 विषय), राज्य सूची (54 विषय) एवं समवर्ती सूची (दोनों के लिए 36 विषय) के आधार पर शक्तियों का बंटवारा किया गया। अवशिष्ट शक्तियाँ वायसराय (गवर्नर जनरल) को दी गयी। 3. प्रांतीय स्तर पर द्वैध शासन को समाप्त कर दिया गया जिसका उद्देश्य प्रांतीय स्वायत्तता को बढ़ावा देना था। लेकिन अब केंद्र स्तर पर द्वैध शासन प्रणाली स्थापित की गयी। इस अधिनियम के तहत राज्यों में उत्तरदायी सरकार की स्थापना का प्रावधान किया गया। 4. दलितों, महिलाओं और मजदूर वर्ग के लिए अलग से निर्वाचन की व्यवस्था कर सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का विस्तार किया गया। 5. इस एक्ट के तहत संघीय न्यायालय (1937) की स्थापना की गयी, संघीय न्यायालय के निर्णय के खिलाफ अपील प्रिवी कौंसिल में की जा सकती थी। 6. इस अधिनियम के तहत संघीय लोक सेवा आयोग की स्थापना की गयी, साथ ही प्रांतीय सेवा आयोग और दो या अधिक राज्यों के लिए संयुक्त सेवा आयोग की स्थापना भी की गयी। 7. इसके तहत एक केंद्रीय बैंक की स्थापना की गयी तथा बर्मा को भारत से पृथक कर दिया गया। 8. 6 प्रांतों में द्विसदनीय व्यवस्था प्रारम्भ की गयी-बंगाल, बम्बई, मद्रास, बिहार, संयुक्त प्रान्त व असम। 9. इस अधिनियम के अध्याय 5 में अपवर्जित क्षेत्र तथा आंशिक रूप से अपवर्जित क्षेत्र सम्बन्धी प्रावधान किये गए। • ज्ञातव्य है कि आजादी के बाद तथा भारत के संविधान के प्रवर्तन के बीच के काल में भारत सरकार भारत शासन अधिनियम, 1935 उपबंधों के अधीन कार्य करती रही। • वर्तमान संविधान में लगभग 250 से अधिक अनुच्छेद भारत शासन अधिनियम 1935 से लिए गए हैं। अत: इसे भारतीय संविधान का मूल आधार माना जाता है।