Explanations:
कुषाण वंश के शासक कनिष्क के शासनकाल के दौरान चतुर्थ बौद्ध संगीत का आयोजन कश्मीर के कुण्डलवन में 102 ई. हुआ। इसके अध्यक्ष वसुमित्र एवं उपाध्यक्ष अश्वघोष थे। इसी संगीति में बौद्ध धर्म दो सम्प्रदायो हीनयान एवं महायान में विभाजित हुआ। ध्यातव्य है कि जिन अनुयायियों ने बिना किसी परिवर्तन के बुद्ध के मूल उपदेशों को स्वीकार किया वे हीनयानी कहलाये, ये लोग रूढि़वादी व निम्नमार्गी थे एवं बुद्ध को महापुरुष मानते थे और भगवान के रूप में उनकी पूजा नही करते थे। बौद्ध धर्म के कठोर तथा परपंरागत नियमों मे परिवर्तन करने वाले महायानी कहलाये।