search
Q: Which Committee suggested the enactment of the Competition Act, 2002? किस समिति ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 को अधिनियमित करने का सुझाव दिया?
  • A. Vijay Kelkar Committee/विजय केलकर समिति
  • B. Rangarajan Committee/रंगराजन समिति
  • C. S.V.S. Raghavan Committee/एस.वी.एस. राघवन समिति
  • D. More than one of the above/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
Correct Answer: Option C - भारत में प्रतिस्पर्धा आयोग का गठन एस.वी.एस. राघवन समिति की सिफारिश पर 1969 के एकाधिकार तथा प्रतिबंधित व्यापार अधिनियम (MRTP) के स्थान पर प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत 14 अक्टूबर, 2003 को किया गया है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष तथा छ: सदस्य शामिल होते हैं। यह आयोग एक सांविधिक एवं अर्द्ध -न्यायिक निकाय के रूप में गठित किया गया है। इस आयोग का विजन, नियोजन तथा प्रवर्तन के माध्यम से एक ऐसी समर्थकारी प्रतिस्पर्धा संस्कृति को बढ़ावा देना तथा बनाए रखना जो व्यापार को उचित प्रतिस्पर्धी तथा नवाचारी बनानें, उपभोक्ता कल्याण में वृद्धि करने और आर्थिक वृद्धि में संबल देने को प्रेरित करना है।
C. भारत में प्रतिस्पर्धा आयोग का गठन एस.वी.एस. राघवन समिति की सिफारिश पर 1969 के एकाधिकार तथा प्रतिबंधित व्यापार अधिनियम (MRTP) के स्थान पर प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत 14 अक्टूबर, 2003 को किया गया है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष तथा छ: सदस्य शामिल होते हैं। यह आयोग एक सांविधिक एवं अर्द्ध -न्यायिक निकाय के रूप में गठित किया गया है। इस आयोग का विजन, नियोजन तथा प्रवर्तन के माध्यम से एक ऐसी समर्थकारी प्रतिस्पर्धा संस्कृति को बढ़ावा देना तथा बनाए रखना जो व्यापार को उचित प्रतिस्पर्धी तथा नवाचारी बनानें, उपभोक्ता कल्याण में वृद्धि करने और आर्थिक वृद्धि में संबल देने को प्रेरित करना है।

Explanations:

भारत में प्रतिस्पर्धा आयोग का गठन एस.वी.एस. राघवन समिति की सिफारिश पर 1969 के एकाधिकार तथा प्रतिबंधित व्यापार अधिनियम (MRTP) के स्थान पर प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत 14 अक्टूबर, 2003 को किया गया है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष तथा छ: सदस्य शामिल होते हैं। यह आयोग एक सांविधिक एवं अर्द्ध -न्यायिक निकाय के रूप में गठित किया गया है। इस आयोग का विजन, नियोजन तथा प्रवर्तन के माध्यम से एक ऐसी समर्थकारी प्रतिस्पर्धा संस्कृति को बढ़ावा देना तथा बनाए रखना जो व्यापार को उचित प्रतिस्पर्धी तथा नवाचारी बनानें, उपभोक्ता कल्याण में वृद्धि करने और आर्थिक वृद्धि में संबल देने को प्रेरित करना है।