Explanations:
स्वराज पार्टी ने घोषणा पत्र में अपनी नीति की घोषणा करते हुए यह प्रतिज्ञा की थी कि वे केन्द्रीय विधान सभा एवं प्रान्तीय परिषदों के माध्यम से सरकार के कामकाज को रोकने के लिए सतत, सुसंगत और अविरल अवरोध की नीति का अनुसरण करेंगे। इस प्रकार इसके निम्न उद्देश्य थे– (1) असहयोग को कौंसिल तक पहुँचाना। (2) 1919 के सुधारों की योजना का ध्वंस, एक समान सतत् और समनुरूप अवरोधन की नीति द्वारा करना। (3) भारत को स्वराज दिलाना।