search
Q: माण्डू इसके लिए प्रसिद्ध है–
  • A. जैन चित्रकारी
  • B. बुद्ध लघुचित्र
  • C. बौद्ध भित्तिचित्र
  • D. इतिहास-पूर्व गुफायें
Correct Answer: Option A - माण्डू को पहले शादियाबाद के नाम से भी जाना जाता था, जिसका अर्थ है- खुशियों का नगर। माण्डू में पर्यटकों के लिए देखने लायक बहुत से स्थान हैं, जिसमें रानी रूपमती का महल, हिन्डोला महल, जहाल महल, जामा मस्जिद, अशरफी महल आदि स्थान प्रमुख है। इसी के साथ ही माण्डू को मांडवगढ़ जैन तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ भगवान सुपाश्र्वनाथ की पद्माशन मुद्रा में विराजित श्वेत वर्णी सुन्दर प्राचीन प्रतिमा है। इस प्रतिमा की स्थापना सन् 1472 में की गई थी। मांडवगढ़ में कई अन्य पुराने ऐतिहासिक महत्व के जैन मन्दिर भी है, जिसके कारण यह जैन धर्माबलंबियों के लिए एक तीर्थ स्थान है।
A. माण्डू को पहले शादियाबाद के नाम से भी जाना जाता था, जिसका अर्थ है- खुशियों का नगर। माण्डू में पर्यटकों के लिए देखने लायक बहुत से स्थान हैं, जिसमें रानी रूपमती का महल, हिन्डोला महल, जहाल महल, जामा मस्जिद, अशरफी महल आदि स्थान प्रमुख है। इसी के साथ ही माण्डू को मांडवगढ़ जैन तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ भगवान सुपाश्र्वनाथ की पद्माशन मुद्रा में विराजित श्वेत वर्णी सुन्दर प्राचीन प्रतिमा है। इस प्रतिमा की स्थापना सन् 1472 में की गई थी। मांडवगढ़ में कई अन्य पुराने ऐतिहासिक महत्व के जैन मन्दिर भी है, जिसके कारण यह जैन धर्माबलंबियों के लिए एक तीर्थ स्थान है।

Explanations:

माण्डू को पहले शादियाबाद के नाम से भी जाना जाता था, जिसका अर्थ है- खुशियों का नगर। माण्डू में पर्यटकों के लिए देखने लायक बहुत से स्थान हैं, जिसमें रानी रूपमती का महल, हिन्डोला महल, जहाल महल, जामा मस्जिद, अशरफी महल आदि स्थान प्रमुख है। इसी के साथ ही माण्डू को मांडवगढ़ जैन तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ भगवान सुपाश्र्वनाथ की पद्माशन मुद्रा में विराजित श्वेत वर्णी सुन्दर प्राचीन प्रतिमा है। इस प्रतिमा की स्थापना सन् 1472 में की गई थी। मांडवगढ़ में कई अन्य पुराने ऐतिहासिक महत्व के जैन मन्दिर भी है, जिसके कारण यह जैन धर्माबलंबियों के लिए एक तीर्थ स्थान है।