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Q: When was Rowlett Act passed by Imperial Legislative Council?
  • A. 1912
  • B. 1919
  • C. 1918
  • D. 1911
Correct Answer: Option B - रोलेट एक्ट इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा पारित एक राष्ट्रवाद विरोधी कानून था। यह मार्च 1919 में पारित किया गया था । यह एक विशेष अदालत के माध्यम से मुकदमों की त्वरित सुनवार्ई के लिए लाया गया था ; जिसके विरूद्ध कोई अपील नहीं की जा सकती थी। इसी प्रतिक्रिया स्वरूप गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन की नींव रखी तथा 14 फरवरी , 1919 को सत्याग्रह का आयोजन किया । रोलट एक्ट के विरोध में शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए जुटी भीड़ पर जलियावाला बाग में जनरल डायर ने गोली चलाने का आदेश दे दिया । जिसको इतिहास में जलियावाला बाग हत्याकाण्ड के नाम से जाना जाता है। इसके विरोध में रवीन्द्र नाथ टैगोर ने ‘नाइटहुड’ की उपाधि वापस कर दी तथा महात्मा गाँधी ने वैâसरे-हिन्द की उपाधि वापस कर दी ।
B. रोलेट एक्ट इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा पारित एक राष्ट्रवाद विरोधी कानून था। यह मार्च 1919 में पारित किया गया था । यह एक विशेष अदालत के माध्यम से मुकदमों की त्वरित सुनवार्ई के लिए लाया गया था ; जिसके विरूद्ध कोई अपील नहीं की जा सकती थी। इसी प्रतिक्रिया स्वरूप गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन की नींव रखी तथा 14 फरवरी , 1919 को सत्याग्रह का आयोजन किया । रोलट एक्ट के विरोध में शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए जुटी भीड़ पर जलियावाला बाग में जनरल डायर ने गोली चलाने का आदेश दे दिया । जिसको इतिहास में जलियावाला बाग हत्याकाण्ड के नाम से जाना जाता है। इसके विरोध में रवीन्द्र नाथ टैगोर ने ‘नाइटहुड’ की उपाधि वापस कर दी तथा महात्मा गाँधी ने वैâसरे-हिन्द की उपाधि वापस कर दी ।

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रोलेट एक्ट इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा पारित एक राष्ट्रवाद विरोधी कानून था। यह मार्च 1919 में पारित किया गया था । यह एक विशेष अदालत के माध्यम से मुकदमों की त्वरित सुनवार्ई के लिए लाया गया था ; जिसके विरूद्ध कोई अपील नहीं की जा सकती थी। इसी प्रतिक्रिया स्वरूप गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन की नींव रखी तथा 14 फरवरी , 1919 को सत्याग्रह का आयोजन किया । रोलट एक्ट के विरोध में शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए जुटी भीड़ पर जलियावाला बाग में जनरल डायर ने गोली चलाने का आदेश दे दिया । जिसको इतिहास में जलियावाला बाग हत्याकाण्ड के नाम से जाना जाता है। इसके विरोध में रवीन्द्र नाथ टैगोर ने ‘नाइटहुड’ की उपाधि वापस कर दी तथा महात्मा गाँधी ने वैâसरे-हिन्द की उपाधि वापस कर दी ।