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Q: When measuring on sloping ground, which method involves taking measurements along the slope itself?/ढालू भूमि पर माप करते समय, किस विधि में ढलान के साथ-साथ माप लेना शामिल होता है?
  • A. Direct method/प्रत्यक्ष विधि
  • B. Vertical interval method/ऊर्ध्वाधर अन्तराल विधि
  • C. Horizontal sub-tension method/क्षैतिज उप तनन विधि
  • D. Sagging method/झोल विधि
Correct Answer: Option A - धरती पर स्थित दो ढालू बिन्दुओं के मध्य क्षैतिज दूरी निम्न प्रकार से ज्ञात की जाती है- (i) सीधी माप विधि (Direct or stepping method) (ii) कोणीय माप विधि (Angular method) (iii) कर्ण-बढ़ती विधि (Hypotenusel allowance method) सीधी माप विधि में ढालू सतह को छोटी-छोटी क्षैतिज सीढ़ी (Steps) में बाँट लिया जाता है और प्रत्येक क्षैतिज दूरी को माप कर सबको जोड़ लिया जाता है। आसानी तथा परिशुद्धता के लिये मापन कार्य ढाल के ऊपरी सिरे से निचले सिरे की ओर करना चाहिए। यह विधि असम ढाल के लिये उपयुक्त है।
A. धरती पर स्थित दो ढालू बिन्दुओं के मध्य क्षैतिज दूरी निम्न प्रकार से ज्ञात की जाती है- (i) सीधी माप विधि (Direct or stepping method) (ii) कोणीय माप विधि (Angular method) (iii) कर्ण-बढ़ती विधि (Hypotenusel allowance method) सीधी माप विधि में ढालू सतह को छोटी-छोटी क्षैतिज सीढ़ी (Steps) में बाँट लिया जाता है और प्रत्येक क्षैतिज दूरी को माप कर सबको जोड़ लिया जाता है। आसानी तथा परिशुद्धता के लिये मापन कार्य ढाल के ऊपरी सिरे से निचले सिरे की ओर करना चाहिए। यह विधि असम ढाल के लिये उपयुक्त है।

Explanations:

धरती पर स्थित दो ढालू बिन्दुओं के मध्य क्षैतिज दूरी निम्न प्रकार से ज्ञात की जाती है- (i) सीधी माप विधि (Direct or stepping method) (ii) कोणीय माप विधि (Angular method) (iii) कर्ण-बढ़ती विधि (Hypotenusel allowance method) सीधी माप विधि में ढालू सतह को छोटी-छोटी क्षैतिज सीढ़ी (Steps) में बाँट लिया जाता है और प्रत्येक क्षैतिज दूरी को माप कर सबको जोड़ लिया जाता है। आसानी तथा परिशुद्धता के लिये मापन कार्य ढाल के ऊपरी सिरे से निचले सिरे की ओर करना चाहिए। यह विधि असम ढाल के लिये उपयुक्त है।