Correct Answer:
Option C - नार्वेस्टर (काल बैसाखी) नामक छोटे आकार के तूफानों का उद्भव बंगाल की खाड़ी के शीर्ष भाग में अप्रैल-मई महीने में (ग्रीष्म काल में) होता है। मार्च से मई की अवधि में उत्तर भारत में तापान्तर तेजी से बढ़ता है और वायुदाब कम हो जाता है दक्षिणी हिन्द महासागर में भी तापमान कम हो जाता है तथा उत्तर पश्चिम भारत के शुष्क क्षेत्रों में मई के महीने में दिन का उच्च तापमान 48⁰ C से अधिक हो जाता है। निम्न वायुदाब का क्षेत्र भी इसी प्रदेश में स्थित होता है, इस निम्न वायुदाब की ओर स्थानीय पवनें चलने लगती हैं। ये पवनें धूल भरी आधियाँ तथा तडित झंझाओं से परिपूर्ण होती हैं। जहाँ समुद्री आर्द्र पवनें स्थानीय गरम और शुष्क पवनों से मिलती हैं, उन प्रदेशों में अक्सर प्रचण्ड तूफान बन जाते हैं। इन तूफानों के साथ तेज हवाएँ मूसलाधार वर्षा और ओले पड़ते हैं, इससे भारी विनाश होता है, ये तूफान पश्चिम बंगाल और असम में प्राय: आते हैं, जहाँ इन्हें क्रमश: `काल वैशाखी’ और `बारदोली छीड़ा’ कहते हैं।
C. नार्वेस्टर (काल बैसाखी) नामक छोटे आकार के तूफानों का उद्भव बंगाल की खाड़ी के शीर्ष भाग में अप्रैल-मई महीने में (ग्रीष्म काल में) होता है। मार्च से मई की अवधि में उत्तर भारत में तापान्तर तेजी से बढ़ता है और वायुदाब कम हो जाता है दक्षिणी हिन्द महासागर में भी तापमान कम हो जाता है तथा उत्तर पश्चिम भारत के शुष्क क्षेत्रों में मई के महीने में दिन का उच्च तापमान 48⁰ C से अधिक हो जाता है। निम्न वायुदाब का क्षेत्र भी इसी प्रदेश में स्थित होता है, इस निम्न वायुदाब की ओर स्थानीय पवनें चलने लगती हैं। ये पवनें धूल भरी आधियाँ तथा तडित झंझाओं से परिपूर्ण होती हैं। जहाँ समुद्री आर्द्र पवनें स्थानीय गरम और शुष्क पवनों से मिलती हैं, उन प्रदेशों में अक्सर प्रचण्ड तूफान बन जाते हैं। इन तूफानों के साथ तेज हवाएँ मूसलाधार वर्षा और ओले पड़ते हैं, इससे भारी विनाश होता है, ये तूफान पश्चिम बंगाल और असम में प्राय: आते हैं, जहाँ इन्हें क्रमश: `काल वैशाखी’ और `बारदोली छीड़ा’ कहते हैं।