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Q: When a manager monitors the work performance of workers in his department to determine if the quality of their work is 'up to standard' or not then this manager is engaging in which type of function? जब कोई प्रबंधक यह निर्धारित करने के लिये अपने विभाग में श्रमिकों के कार्य प्रदर्शन की निगरानी करता है कि उनके काम की गुणवत्ता, मानक के अनुरुप है या नहीं तो यह प्रबंधक किस प्रकार के कार्य में संलग्न है?
  • A. Planning/आयोजन
  • B. Organizing/संगठन
  • C. Controlling/नियंत्रण
  • D. Leading/अग्रणी
Correct Answer: Option C - नियंत्रण (Controlling):- यदि कार्य की प्रगति-दर आयोजित-दर से कम होती है तो प्रबन्धक को यथा समय कार्यवाही करके इसमें सुधार लाना चाहिये संतोषजनक प्रगति में वाधा उत्पन्न करने वाले कारणों पर विशेष ध्यान देना चाहिये ओर उन्हें अतिशीघ्र दूर करना चाहिये। → कर्मचारियों श्रमिकों के कार्य की प्रगति रिपोर्ट तथा आवश्यक आंकड़े समयबद्ध कार्यक्रम के अनुसार प्रबन्धको तक पहुंचनी चाहिए और उनका विश्लेषण करके सुधार के उपाय अपनाने चाहिए। → निर्माण सामग्री की खपत प्रभावी नियंत्रण रहना चाहिये, जिससे उनका अपव्यय न होने पाये। → विभिन्न कार्यों पर समुचित नियंत्रण हो जिससे निर्माण की गुणवत्ता बनी रहे।
C. नियंत्रण (Controlling):- यदि कार्य की प्रगति-दर आयोजित-दर से कम होती है तो प्रबन्धक को यथा समय कार्यवाही करके इसमें सुधार लाना चाहिये संतोषजनक प्रगति में वाधा उत्पन्न करने वाले कारणों पर विशेष ध्यान देना चाहिये ओर उन्हें अतिशीघ्र दूर करना चाहिये। → कर्मचारियों श्रमिकों के कार्य की प्रगति रिपोर्ट तथा आवश्यक आंकड़े समयबद्ध कार्यक्रम के अनुसार प्रबन्धको तक पहुंचनी चाहिए और उनका विश्लेषण करके सुधार के उपाय अपनाने चाहिए। → निर्माण सामग्री की खपत प्रभावी नियंत्रण रहना चाहिये, जिससे उनका अपव्यय न होने पाये। → विभिन्न कार्यों पर समुचित नियंत्रण हो जिससे निर्माण की गुणवत्ता बनी रहे।

Explanations:

नियंत्रण (Controlling):- यदि कार्य की प्रगति-दर आयोजित-दर से कम होती है तो प्रबन्धक को यथा समय कार्यवाही करके इसमें सुधार लाना चाहिये संतोषजनक प्रगति में वाधा उत्पन्न करने वाले कारणों पर विशेष ध्यान देना चाहिये ओर उन्हें अतिशीघ्र दूर करना चाहिये। → कर्मचारियों श्रमिकों के कार्य की प्रगति रिपोर्ट तथा आवश्यक आंकड़े समयबद्ध कार्यक्रम के अनुसार प्रबन्धको तक पहुंचनी चाहिए और उनका विश्लेषण करके सुधार के उपाय अपनाने चाहिए। → निर्माण सामग्री की खपत प्रभावी नियंत्रण रहना चाहिये, जिससे उनका अपव्यय न होने पाये। → विभिन्न कार्यों पर समुचित नियंत्रण हो जिससे निर्माण की गुणवत्ता बनी रहे।