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Q: What would most appropriately describe the risk of incorrect rejection in terms of substantive testing? मौलिक जाँच के संदर्भ में गलत अस्वीकृति के जोखिम का वर्णन सबसे सटीक ढंग से कौन करता है?
  • A. The auditor concludes balance is materially correct when in actual fact it is not/लेखा परीक्षक इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि बैलेंस भौतिक रूप से सही है परन्तु वास्तविक तथ्यों की दृष्टि से सही नहीं है
  • B. The auditor concludes that the balance is materially misstated when in actual fact it not/लेखा परीक्षक इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि बैलेंस भौतिक रूप से अशुद्ध वर्णन किया गया है जबकि वास्तविक तथ्यों की दृष्टि से ऐसा नहीं है
  • C. The auditor has rejected an item for sample which was material/लेखा परीक्षक ने नमूने की वस्तु को अस्वीकृत कर दिया है जो प्रासंगिक था
  • D. None of the above/उपरोक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - मौलिक जाँच- मौलिक जाँच एक अंकेक्षण प्रक्रिया है जो वित्तीय विवरण एवं सहायक साक्ष्य से सम्बन्धित गलतियों का परीक्षण करता है। इस जाँच की आवश्यकता तब होती है जब साक्ष्य की जाँच करनी हो। यह वित्तीय विवरण का पूरी तरह से वैधानिक एवं सत्यता की जाँच है। यदि मौलिक जाँच में गलती एवं मिथ्यावर्णन हो जाता है तो अतिरिक्त जाँच की आवश्यकता होती है। कम्पनी के आन्तरिक अंकेक्षक इस जाँच को सही प्रस्तुत नहीं कर पाते तो वाह्य अंकेक्षक द्वारा मौलिक जाँच की जाती है।
B. मौलिक जाँच- मौलिक जाँच एक अंकेक्षण प्रक्रिया है जो वित्तीय विवरण एवं सहायक साक्ष्य से सम्बन्धित गलतियों का परीक्षण करता है। इस जाँच की आवश्यकता तब होती है जब साक्ष्य की जाँच करनी हो। यह वित्तीय विवरण का पूरी तरह से वैधानिक एवं सत्यता की जाँच है। यदि मौलिक जाँच में गलती एवं मिथ्यावर्णन हो जाता है तो अतिरिक्त जाँच की आवश्यकता होती है। कम्पनी के आन्तरिक अंकेक्षक इस जाँच को सही प्रस्तुत नहीं कर पाते तो वाह्य अंकेक्षक द्वारा मौलिक जाँच की जाती है।

Explanations:

मौलिक जाँच- मौलिक जाँच एक अंकेक्षण प्रक्रिया है जो वित्तीय विवरण एवं सहायक साक्ष्य से सम्बन्धित गलतियों का परीक्षण करता है। इस जाँच की आवश्यकता तब होती है जब साक्ष्य की जाँच करनी हो। यह वित्तीय विवरण का पूरी तरह से वैधानिक एवं सत्यता की जाँच है। यदि मौलिक जाँच में गलती एवं मिथ्यावर्णन हो जाता है तो अतिरिक्त जाँच की आवश्यकता होती है। कम्पनी के आन्तरिक अंकेक्षक इस जाँच को सही प्रस्तुत नहीं कर पाते तो वाह्य अंकेक्षक द्वारा मौलिक जाँच की जाती है।