Explanations:
मुगल काल में ‘इजरा’ राजस्व कृषि की एक व्यवस्था थी। जुल्फिकार खाँ मुगल बादशाह जहाँदार शाह का प्रधानमंत्री था। इसी ने ‘इजरा व्यवस्था’ को बढ़ावा दिया। इसके अन्तर्गत एक निश्चित दर पर भू-राजस्व वसूल करने के बदले में सरकार ने ‘इजारेदार’ यानि लगान के ठेकेदारों और बिचौलियों के साथ यह करार करना आरंभ कर दिया था कि वे सरकार को एक निश्चित मुद्रा राशि दें, बदले में किसानों से जितना लगान वसूल कर सके, उतना वसूलने के लिए उन्हें मुक्त छोड़ दिया गया। इससे किसानों का उत्पीड़न बढ़ा। लेकिन इस व्यवस्था के अधीन किसी भी इजारेदार ने राजकोष में निश्चित राशि जमा नहीं की।