Correct Answer:
Option B - तैल रंग का प्रयोग बाइण्डर में अलसी के तेल या लिन्सीड ऑयल का प्रयोग किया जाता है। तैल माध्यम से प्राय: गिरी, गुठली अथवा बीजों से निकाला हुआ कोई ऐसा तैल प्रयुक्त किया जाता है जिसमें प्राकृतिक रूप से पानी का कुछ अंश रहता है।
• रंग को पतला करने के लिये प्राय: तारपीन का तैल थिनर या पेट्रोल का प्रयोग किया जाता है।
• तैल चित्रण में भित्ति सर्वाति प्राचीन रूप है काष्ठ फलक, बोर्ड एवं गैसों आदि पर तैल माध्यम में चित्रकारी की जाती थी। इसके हेतु सर्वोत्तम चित्रभूमि कैनवास है जो जूट तथा सन व कपास के मिश्रण से निर्मित किया जाता है।
B. तैल रंग का प्रयोग बाइण्डर में अलसी के तेल या लिन्सीड ऑयल का प्रयोग किया जाता है। तैल माध्यम से प्राय: गिरी, गुठली अथवा बीजों से निकाला हुआ कोई ऐसा तैल प्रयुक्त किया जाता है जिसमें प्राकृतिक रूप से पानी का कुछ अंश रहता है।
• रंग को पतला करने के लिये प्राय: तारपीन का तैल थिनर या पेट्रोल का प्रयोग किया जाता है।
• तैल चित्रण में भित्ति सर्वाति प्राचीन रूप है काष्ठ फलक, बोर्ड एवं गैसों आदि पर तैल माध्यम में चित्रकारी की जाती थी। इसके हेतु सर्वोत्तम चित्रभूमि कैनवास है जो जूट तथा सन व कपास के मिश्रण से निर्मित किया जाता है।