Correct Answer:
Option D - परीक्षण संतुलन की सीमा–
(1) दोहरा लेखा प्रणाली के नियमों के पालन की जाँच करना।
(2) खातों के अंकगणितीय शुद्धता की जाँच करना।
(3) अन्तिम खाते बनाने में सुविधा प्रदान करना।
(4) तुलनात्मक अध्ययन में सहायता करना।
(5) तलपट में प्रकट होने वाली अशुद्धियाँ–बहियों का अशुद्ध योग लगाना, खतौनी में अशुद्धि, गलत पक्ष में खतौनी, खातों के योग एवं शेष निकालने में अशुद्धियाँ, तलपट में किसी खाते का छूट जाना।
(6) तलपट से प्रकट न होने वाली अशुद्धियाँ–
(I) भूल की अशुद्धियाँ
(I) सहायक बहियों की अशुद्धियाँ
(I) सैद्धान्तिक अशुद्धियाँ
(I) क्षतिपूरक अशुद्धियाँ
D. परीक्षण संतुलन की सीमा–
(1) दोहरा लेखा प्रणाली के नियमों के पालन की जाँच करना।
(2) खातों के अंकगणितीय शुद्धता की जाँच करना।
(3) अन्तिम खाते बनाने में सुविधा प्रदान करना।
(4) तुलनात्मक अध्ययन में सहायता करना।
(5) तलपट में प्रकट होने वाली अशुद्धियाँ–बहियों का अशुद्ध योग लगाना, खतौनी में अशुद्धि, गलत पक्ष में खतौनी, खातों के योग एवं शेष निकालने में अशुद्धियाँ, तलपट में किसी खाते का छूट जाना।
(6) तलपट से प्रकट न होने वाली अशुद्धियाँ–
(I) भूल की अशुद्धियाँ
(I) सहायक बहियों की अशुद्धियाँ
(I) सैद्धान्तिक अशुद्धियाँ
(I) क्षतिपूरक अशुद्धियाँ