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Q: What is neonatal Jaundice ? नवजात पीलिया क्या है ? I. Condition in many newborn babies caused by immaturity of liver and evidence by yellowish appearance. I. कई नवजात शिशुओं मे ये स्थिति जिगर की अपरिपक्वता के कारण होती है और पीले रंग की उपस्थिति से प्रमाणित होती है। II. If not treated promptly, it can cause damage to the brain. II. अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो यह मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • A. Neither I nor II/ना ही I ना ही II
  • B. Only II/केवल II
  • C. Only I/केवल I
  • D. Both I and II/I तथा II दोनों
Correct Answer: Option D - सभी स्वस्थ शिशुओं में से आधे से ज्यादा को जन्म के पहले हफ्ते में पीलिया (जॉन्डिस) होता है। समय से पहले जन्में शिशुओं में यह और भी ज्यादा आम है। यह शिशुओं में तब होता है जब शिशु के शरीर में प्राकृतिक रसायन पित्तरंजक (बिलीरूबिन) बहुत ज्यादा मात्रा में बनने लगता हैं। यह आमतौर पर जन्म के दो या तीन दिन बाद दिखाई देता हैं। इसका पता शिशु के शरीर के पीले रंग की उपस्थिति से पता चलता हैं। यह उतनी बड़ी बिमारी नहीं होती परन्तु सही समय पर इलाज न कराने पर यह मस्तिष्क तक पहुँचकर नुकसान पहुँचाने लगता है। जब शिशु दो हफ्ते का होता है तब तक यह सही हो जाता है। अत: I तथा II दोनों कथन सही है।
D. सभी स्वस्थ शिशुओं में से आधे से ज्यादा को जन्म के पहले हफ्ते में पीलिया (जॉन्डिस) होता है। समय से पहले जन्में शिशुओं में यह और भी ज्यादा आम है। यह शिशुओं में तब होता है जब शिशु के शरीर में प्राकृतिक रसायन पित्तरंजक (बिलीरूबिन) बहुत ज्यादा मात्रा में बनने लगता हैं। यह आमतौर पर जन्म के दो या तीन दिन बाद दिखाई देता हैं। इसका पता शिशु के शरीर के पीले रंग की उपस्थिति से पता चलता हैं। यह उतनी बड़ी बिमारी नहीं होती परन्तु सही समय पर इलाज न कराने पर यह मस्तिष्क तक पहुँचकर नुकसान पहुँचाने लगता है। जब शिशु दो हफ्ते का होता है तब तक यह सही हो जाता है। अत: I तथा II दोनों कथन सही है।

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सभी स्वस्थ शिशुओं में से आधे से ज्यादा को जन्म के पहले हफ्ते में पीलिया (जॉन्डिस) होता है। समय से पहले जन्में शिशुओं में यह और भी ज्यादा आम है। यह शिशुओं में तब होता है जब शिशु के शरीर में प्राकृतिक रसायन पित्तरंजक (बिलीरूबिन) बहुत ज्यादा मात्रा में बनने लगता हैं। यह आमतौर पर जन्म के दो या तीन दिन बाद दिखाई देता हैं। इसका पता शिशु के शरीर के पीले रंग की उपस्थिति से पता चलता हैं। यह उतनी बड़ी बिमारी नहीं होती परन्तु सही समय पर इलाज न कराने पर यह मस्तिष्क तक पहुँचकर नुकसान पहुँचाने लगता है। जब शिशु दो हफ्ते का होता है तब तक यह सही हो जाता है। अत: I तथा II दोनों कथन सही है।