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Q: ‘वयं फलानि खादाम:’ इत्यस्य वाक्यस्य कर्मवाच्ये रूपं भवति।
  • A. मया फलानि खाद्यन्ते।
  • B. अस्माभि: फलानि खाद्यन्ते।
  • C. अस्मभ्यं फलानि खाद्यन्ते।
  • D. अस्माभि: फलं खाद्यते।
Correct Answer: Option B - ‘वयं फलानि खादाम:’ इत्यस्य वाक्यस्य कर्मवाच्ये रूपं ‘अस्माभि: फलानि खाद्यन्ते’ भवति। अर्थात् कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तित करने पर वाक्य का कर्ता (कर्तृवाच्य का) जिस लिङ्ग या वचन में, कर्म प्रथमा विभक्ति में, और क्रिया कर्म के अुनसार आत्मनेपदी में परिवर्तित होती है। अत: वाच्य परिवर्तन तीन प्रकार का होता है। (1) कर्तृवाच्य (कर्ता की प्रधानता) (2) कर्मवाच्य (कर्म की प्रधानता) (3) भाववाच्य (भाव की प्रधानता) है।
B. ‘वयं फलानि खादाम:’ इत्यस्य वाक्यस्य कर्मवाच्ये रूपं ‘अस्माभि: फलानि खाद्यन्ते’ भवति। अर्थात् कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तित करने पर वाक्य का कर्ता (कर्तृवाच्य का) जिस लिङ्ग या वचन में, कर्म प्रथमा विभक्ति में, और क्रिया कर्म के अुनसार आत्मनेपदी में परिवर्तित होती है। अत: वाच्य परिवर्तन तीन प्रकार का होता है। (1) कर्तृवाच्य (कर्ता की प्रधानता) (2) कर्मवाच्य (कर्म की प्रधानता) (3) भाववाच्य (भाव की प्रधानता) है।

Explanations:

‘वयं फलानि खादाम:’ इत्यस्य वाक्यस्य कर्मवाच्ये रूपं ‘अस्माभि: फलानि खाद्यन्ते’ भवति। अर्थात् कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तित करने पर वाक्य का कर्ता (कर्तृवाच्य का) जिस लिङ्ग या वचन में, कर्म प्रथमा विभक्ति में, और क्रिया कर्म के अुनसार आत्मनेपदी में परिवर्तित होती है। अत: वाच्य परिवर्तन तीन प्रकार का होता है। (1) कर्तृवाच्य (कर्ता की प्रधानता) (2) कर्मवाच्य (कर्म की प्रधानता) (3) भाववाच्य (भाव की प्रधानता) है।