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Q: वैदिक कालीन ‘चतुराश्रम’ व्यवस्था के अनुसार, पारिवारिक अवधि के लिए निम्न में से किस पद का प्रावधान किया गया है?
  • A. संन्यास
  • B. ब्रह्मचर्य
  • C. वानप्रस्थ
Correct Answer: Option C - वैदिक कालीन चतुराश्रम व्यवस्था के अनुसार मानव जीवन को चार आश्रमों में बाँटा गया है। ये चार है - ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास। छान्दोग्य उपनिषद में तीन आश्रमों का उल्लेख है परन्तु जबालोपनिषद में चारों आश्रमों का उल्लेख मिलता है। गृहस्थ आश्रम - इस समय मनुष्य को अपने सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह चरण 25 वर्ष से शुरू होता है और 50 वर्ष तक रहता है। गृहस्थ व्यक्ति के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ मनुष्य को अपने पारिवारिक और सामाजिक कर्तव्यों दोनों को सन्तुलित करना होता है।
C. वैदिक कालीन चतुराश्रम व्यवस्था के अनुसार मानव जीवन को चार आश्रमों में बाँटा गया है। ये चार है - ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास। छान्दोग्य उपनिषद में तीन आश्रमों का उल्लेख है परन्तु जबालोपनिषद में चारों आश्रमों का उल्लेख मिलता है। गृहस्थ आश्रम - इस समय मनुष्य को अपने सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह चरण 25 वर्ष से शुरू होता है और 50 वर्ष तक रहता है। गृहस्थ व्यक्ति के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ मनुष्य को अपने पारिवारिक और सामाजिक कर्तव्यों दोनों को सन्तुलित करना होता है।

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वैदिक कालीन चतुराश्रम व्यवस्था के अनुसार मानव जीवन को चार आश्रमों में बाँटा गया है। ये चार है - ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास। छान्दोग्य उपनिषद में तीन आश्रमों का उल्लेख है परन्तु जबालोपनिषद में चारों आश्रमों का उल्लेख मिलता है। गृहस्थ आश्रम - इस समय मनुष्य को अपने सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह चरण 25 वर्ष से शुरू होता है और 50 वर्ष तक रहता है। गृहस्थ व्यक्ति के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ मनुष्य को अपने पारिवारिक और सामाजिक कर्तव्यों दोनों को सन्तुलित करना होता है।