Correct Answer:
Option D - वेदों के अंग को वेदांग कहा जाता है। वेदांगों की संख्या छ: है- शिक्षा, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष और कल्प। इनमें से वेदों का अंग निरुक्त जटिल शब्दों के अर्थ एवं व्याख्या के लिए प्रसिद्ध है। जो कठिन शब्द व्याकरण की पहुँच से बाहर थे, उनके अर्थ जानने के लिए ही निरूक्त की रचना हुई। निरूक्त के रचयिता यास्क है। यास्क मुनि ने निरूक्त को व्याकरण का पूरक माना है।
D. वेदों के अंग को वेदांग कहा जाता है। वेदांगों की संख्या छ: है- शिक्षा, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष और कल्प। इनमें से वेदों का अंग निरुक्त जटिल शब्दों के अर्थ एवं व्याख्या के लिए प्रसिद्ध है। जो कठिन शब्द व्याकरण की पहुँच से बाहर थे, उनके अर्थ जानने के लिए ही निरूक्त की रचना हुई। निरूक्त के रचयिता यास्क है। यास्क मुनि ने निरूक्त को व्याकरण का पूरक माना है।