Correct Answer:
Option D - विरतास्वभिधाद्यासु ययाऽर्थो बोध्यतेऽपर: सा वृत्ति: व्यञ्जना अस्ति।
अर्थात् जब अभिधादि (अभिधा, लक्षणा तथा तात्पर्या) वृत्तियाँ अपना-अपना अर्थ प्रकट करके क्षीण होने पर जिस वृत्ति से अन्य अर्थ का बोध होता है, वह शब्द और अर्थ आदि की वृत्ति व्यञ्जना कहलाती है। अत: विकल्प (d) सही है। शेष अन्य विकल्प इस प्रकार हैं- शब्द की तीन शक्तियाँ होती हैं-
(1) अभिधा- वाच्यार्थ में- तत्रसंकेतितार्थ बोधनादग्रिमाऽभिधा।
(2) लक्षणा लक्ष्यार्थ में- मुख्यार्थबाधे तद्युक्तोययाऽन्योऽर्थ:प्रतीयते।
इसके कुल - 80 भेद हैं।
(3) व्यञ्जना व्यङ्गयार्थ में - विरतास्वभिधाद्यासुययाऽर्थो बोध्यतेऽपर:
सा शक्ति व्यंञ्जना नाम शब्दस्यार्थादिकस्य च।।
इसके अतिरिक्त मीमांसकों की चौथी तात्पर्यावृत्ति मान्य है।
D. विरतास्वभिधाद्यासु ययाऽर्थो बोध्यतेऽपर: सा वृत्ति: व्यञ्जना अस्ति।
अर्थात् जब अभिधादि (अभिधा, लक्षणा तथा तात्पर्या) वृत्तियाँ अपना-अपना अर्थ प्रकट करके क्षीण होने पर जिस वृत्ति से अन्य अर्थ का बोध होता है, वह शब्द और अर्थ आदि की वृत्ति व्यञ्जना कहलाती है। अत: विकल्प (d) सही है। शेष अन्य विकल्प इस प्रकार हैं- शब्द की तीन शक्तियाँ होती हैं-
(1) अभिधा- वाच्यार्थ में- तत्रसंकेतितार्थ बोधनादग्रिमाऽभिधा।
(2) लक्षणा लक्ष्यार्थ में- मुख्यार्थबाधे तद्युक्तोययाऽन्योऽर्थ:प्रतीयते।
इसके कुल - 80 भेद हैं।
(3) व्यञ्जना व्यङ्गयार्थ में - विरतास्वभिधाद्यासुययाऽर्थो बोध्यतेऽपर:
सा शक्ति व्यंञ्जना नाम शब्दस्यार्थादिकस्य च।।
इसके अतिरिक्त मीमांसकों की चौथी तात्पर्यावृत्ति मान्य है।