Correct Answer:
Option C - ‘‘वाराङ्गनेव नृपनीतिरनेकरूपा’’ यह सूक्ति नीतिशतक की है।
नीतिशतक भर्तृहरि की रचना है। इस सूक्ति का अर्थ है-राजनीति वेश्या की तरह अनेक रूपों वाली होती है। जिस प्रकार वेश्या का स्थायी रूप नहीं होता उसी प्रकार राजनीति का भी कोई स्थायी रूप नहीं होता है। यह हर क्षण अपना रंग बदलने वाली होती है।
C. ‘‘वाराङ्गनेव नृपनीतिरनेकरूपा’’ यह सूक्ति नीतिशतक की है।
नीतिशतक भर्तृहरि की रचना है। इस सूक्ति का अर्थ है-राजनीति वेश्या की तरह अनेक रूपों वाली होती है। जिस प्रकार वेश्या का स्थायी रूप नहीं होता उसी प्रकार राजनीति का भी कोई स्थायी रूप नहीं होता है। यह हर क्षण अपना रंग बदलने वाली होती है।