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Q: ‘‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभि:’’ इत्ययं कुत्र विद्यते?
  • A. शिशुपालवधे
  • B. बुद्धचरिते
  • C. किरातार्जुनीये
  • D. नैषधीयचरिते
Correct Answer: Option C - ‘‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभि:’’यह सूक्ति महाकवि भारवि प्रणीत किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के प्रथम सर्ग की है। इस महाकाव्य में 18 सर्ग है।
C. ‘‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभि:’’यह सूक्ति महाकवि भारवि प्रणीत किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के प्रथम सर्ग की है। इस महाकाव्य में 18 सर्ग है।

Explanations:

‘‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभि:’’यह सूक्ति महाकवि भारवि प्रणीत किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के प्रथम सर्ग की है। इस महाकाव्य में 18 सर्ग है।