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Q: वेल्डिंग में काब्र्यूराइजिंग फ्लेम का प्रयोग कहां किया जाता है?
  • A. पीतल एवं कांस्य
  • B. स्टील, कास्ट आयरन, तांबा, अल्युमीनियम
  • C. पिटवां लोहा (रॉट आयरन)
  • D. कठोर सतह बनाने में
Correct Answer: Option D - यदि उदासीन ज्वाला (Neutral Flame) को दी जाने वाली आक्सीजन की मात्रा घटा दी जाये तो ज्वाला कार्बूराइजिंग या रिडयूसिंग फ्लेम में परवर्तित हो जाती है। इसमें ऑक्सीजन के अनुपात में एसीटिलीन की मात्रा अधिक होती है। यह फ्लेम हार्ड फेसिंग (Hard Facing) के काम भी आती है। इस ज्वाला का प्रयोग निकिल मोनल मैटल (Monel Metal) को वैल्ड करने या चाँदी का टांका लगाने के लिए भी किया जाता है।
D. यदि उदासीन ज्वाला (Neutral Flame) को दी जाने वाली आक्सीजन की मात्रा घटा दी जाये तो ज्वाला कार्बूराइजिंग या रिडयूसिंग फ्लेम में परवर्तित हो जाती है। इसमें ऑक्सीजन के अनुपात में एसीटिलीन की मात्रा अधिक होती है। यह फ्लेम हार्ड फेसिंग (Hard Facing) के काम भी आती है। इस ज्वाला का प्रयोग निकिल मोनल मैटल (Monel Metal) को वैल्ड करने या चाँदी का टांका लगाने के लिए भी किया जाता है।

Explanations:

यदि उदासीन ज्वाला (Neutral Flame) को दी जाने वाली आक्सीजन की मात्रा घटा दी जाये तो ज्वाला कार्बूराइजिंग या रिडयूसिंग फ्लेम में परवर्तित हो जाती है। इसमें ऑक्सीजन के अनुपात में एसीटिलीन की मात्रा अधिक होती है। यह फ्लेम हार्ड फेसिंग (Hard Facing) के काम भी आती है। इस ज्वाला का प्रयोग निकिल मोनल मैटल (Monel Metal) को वैल्ड करने या चाँदी का टांका लगाने के लिए भी किया जाता है।