search
Q: किस शब्द का सन्धि-विच्छेद शुद्ध नहीं है?
  • A. मात्रा + आनन्द = मात्रानन्द
  • B. सदा + एव = सदैव
  • C. पितृ + अनुमति = पित्रनुमति
  • D. परम + औदार्य = परमौदार्य
Correct Answer: Option A - मातृ + आनन्द = मात्रानन्द (ऋ + आ = रा) अयादि सन्धि - ए, ऐ, ओ, अथवा औ, के बाद जब कोई स्वर आता है तब ‘ए’ के सथान पर ‘अय्’, ओ के स्थान पर ‘अव्’ ऐ के स्थान पर ‘आय्’ तथा औ के स्थान पर ‘आव्’ हो जाता है। तो यह अयादि सन्धि कहलाती है। सदा + एव = सदैव (वृद्धिसन्धि) परम + औदार्य = परमौदार्य (वृद्धि सन्धि) पितृ + अनुमति = पित्रनुमति (दीर्घसन्घि)
A. मातृ + आनन्द = मात्रानन्द (ऋ + आ = रा) अयादि सन्धि - ए, ऐ, ओ, अथवा औ, के बाद जब कोई स्वर आता है तब ‘ए’ के सथान पर ‘अय्’, ओ के स्थान पर ‘अव्’ ऐ के स्थान पर ‘आय्’ तथा औ के स्थान पर ‘आव्’ हो जाता है। तो यह अयादि सन्धि कहलाती है। सदा + एव = सदैव (वृद्धिसन्धि) परम + औदार्य = परमौदार्य (वृद्धि सन्धि) पितृ + अनुमति = पित्रनुमति (दीर्घसन्घि)

Explanations:

मातृ + आनन्द = मात्रानन्द (ऋ + आ = रा) अयादि सन्धि - ए, ऐ, ओ, अथवा औ, के बाद जब कोई स्वर आता है तब ‘ए’ के सथान पर ‘अय्’, ओ के स्थान पर ‘अव्’ ऐ के स्थान पर ‘आय्’ तथा औ के स्थान पर ‘आव्’ हो जाता है। तो यह अयादि सन्धि कहलाती है। सदा + एव = सदैव (वृद्धिसन्धि) परम + औदार्य = परमौदार्य (वृद्धि सन्धि) पितृ + अनुमति = पित्रनुमति (दीर्घसन्घि)