Correct Answer:
Option A - मातृ + आनन्द = मात्रानन्द (ऋ + आ = रा)
अयादि सन्धि - ए, ऐ, ओ, अथवा औ, के बाद जब कोई स्वर आता है तब ‘ए’ के सथान पर ‘अय्’, ओ के स्थान पर ‘अव्’ ऐ के स्थान पर ‘आय्’ तथा औ के स्थान पर ‘आव्’ हो जाता है। तो यह अयादि सन्धि कहलाती है।
सदा + एव = सदैव (वृद्धिसन्धि)
परम + औदार्य = परमौदार्य (वृद्धि सन्धि)
पितृ + अनुमति = पित्रनुमति (दीर्घसन्घि)
A. मातृ + आनन्द = मात्रानन्द (ऋ + आ = रा)
अयादि सन्धि - ए, ऐ, ओ, अथवा औ, के बाद जब कोई स्वर आता है तब ‘ए’ के सथान पर ‘अय्’, ओ के स्थान पर ‘अव्’ ऐ के स्थान पर ‘आय्’ तथा औ के स्थान पर ‘आव्’ हो जाता है। तो यह अयादि सन्धि कहलाती है।
सदा + एव = सदैव (वृद्धिसन्धि)
परम + औदार्य = परमौदार्य (वृद्धि सन्धि)
पितृ + अनुमति = पित्रनुमति (दीर्घसन्घि)