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Q: ‘विखण्डनवाद’ का जनक माना जाता है
  • A. रूसो को
  • B. देरीदा को
  • C. सस्यूर को
  • D. रिचर्ड को
Correct Answer: Option B - ‘विखण्डनवाद’ का जनक ‘देरीदा’ को माना जाता है। जॉक देरीदा का जन्म सन् 1930 ई. में अल्जीरिया के यहूदी परिवार में हुआ था। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘ऑफ ग्रामेटोलॉजी’ है। उनका मानना है कि किसी भी पाठ में वर्चस्व और हाशिये या गौड़ का चिंतन भाषाई अर्थ में मौजूद होता है, जो वर्चस्व और गौड़ के रूप में द्विविभाजन से आरंभ होकर निरंतर विकसित होता रहता है अर्थात् वर्चस्ववादी व्यवस्था में किसी पाठ के केंद्र में स्थित अर्थ को विखंडित करके उसकी जगह हाशिये या गौड़ बना दिये गये अर्थ को स्थापित किया जा सकता है। इस रूप में किसी पाठ को पढ़ा जाना विखंडन कहलाता है।
B. ‘विखण्डनवाद’ का जनक ‘देरीदा’ को माना जाता है। जॉक देरीदा का जन्म सन् 1930 ई. में अल्जीरिया के यहूदी परिवार में हुआ था। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘ऑफ ग्रामेटोलॉजी’ है। उनका मानना है कि किसी भी पाठ में वर्चस्व और हाशिये या गौड़ का चिंतन भाषाई अर्थ में मौजूद होता है, जो वर्चस्व और गौड़ के रूप में द्विविभाजन से आरंभ होकर निरंतर विकसित होता रहता है अर्थात् वर्चस्ववादी व्यवस्था में किसी पाठ के केंद्र में स्थित अर्थ को विखंडित करके उसकी जगह हाशिये या गौड़ बना दिये गये अर्थ को स्थापित किया जा सकता है। इस रूप में किसी पाठ को पढ़ा जाना विखंडन कहलाता है।

Explanations:

‘विखण्डनवाद’ का जनक ‘देरीदा’ को माना जाता है। जॉक देरीदा का जन्म सन् 1930 ई. में अल्जीरिया के यहूदी परिवार में हुआ था। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘ऑफ ग्रामेटोलॉजी’ है। उनका मानना है कि किसी भी पाठ में वर्चस्व और हाशिये या गौड़ का चिंतन भाषाई अर्थ में मौजूद होता है, जो वर्चस्व और गौड़ के रूप में द्विविभाजन से आरंभ होकर निरंतर विकसित होता रहता है अर्थात् वर्चस्ववादी व्यवस्था में किसी पाठ के केंद्र में स्थित अर्थ को विखंडित करके उसकी जगह हाशिये या गौड़ बना दिये गये अर्थ को स्थापित किया जा सकता है। इस रूप में किसी पाठ को पढ़ा जाना विखंडन कहलाता है।