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Q: अमीर खुसरो- जिन्हें कव्वाली का पिता एवं भारत का तोता भी कहा जाता है– किसके दरबार में दरबारी कवि थे?
  • A. इल्तुतमिश
  • B. रजिया सुल्तान
  • C. बलबन
  • D. अलाउद्दीन खिलजी
Correct Answer: Option D - अमीर खुुसरो, जिन्हें कव्वाली का पिता एवं भारत का तोता भी कहा जाता है, अलाउद्दीन खिलजी के दरबारी कवि थे। ‘हिन्दी खड़ी बोली’ का जनक माना जाता है। अमीर खुसरो ने 7 सुल्तानों का काल देखा अमीर खुसरो मुस्लिम कवि थे परन्तु हिन्दी के शब्दों, का खुलकर प्रयोग करते थे, इन्होने हिन्दी, हिन्दवी और फारसी को एक साथ किया और ‘खड़ी बोली’ को जन्म दिया। इन्होने काव्यात्मक शैलियों में हिन्दी का प्रयोग किया और फारसी की एक नई शैली की रचना की जो सबक-ए-हिन्दी अर्थात हिन्दुस्तानी शैली के नाम से प्रसिद्ध हुई। इन्हें निजामुद्दीन औलिया ने तुर्वâल्लाह की उपाधि दी थी।
D. अमीर खुुसरो, जिन्हें कव्वाली का पिता एवं भारत का तोता भी कहा जाता है, अलाउद्दीन खिलजी के दरबारी कवि थे। ‘हिन्दी खड़ी बोली’ का जनक माना जाता है। अमीर खुसरो ने 7 सुल्तानों का काल देखा अमीर खुसरो मुस्लिम कवि थे परन्तु हिन्दी के शब्दों, का खुलकर प्रयोग करते थे, इन्होने हिन्दी, हिन्दवी और फारसी को एक साथ किया और ‘खड़ी बोली’ को जन्म दिया। इन्होने काव्यात्मक शैलियों में हिन्दी का प्रयोग किया और फारसी की एक नई शैली की रचना की जो सबक-ए-हिन्दी अर्थात हिन्दुस्तानी शैली के नाम से प्रसिद्ध हुई। इन्हें निजामुद्दीन औलिया ने तुर्वâल्लाह की उपाधि दी थी।

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अमीर खुुसरो, जिन्हें कव्वाली का पिता एवं भारत का तोता भी कहा जाता है, अलाउद्दीन खिलजी के दरबारी कवि थे। ‘हिन्दी खड़ी बोली’ का जनक माना जाता है। अमीर खुसरो ने 7 सुल्तानों का काल देखा अमीर खुसरो मुस्लिम कवि थे परन्तु हिन्दी के शब्दों, का खुलकर प्रयोग करते थे, इन्होने हिन्दी, हिन्दवी और फारसी को एक साथ किया और ‘खड़ी बोली’ को जन्म दिया। इन्होने काव्यात्मक शैलियों में हिन्दी का प्रयोग किया और फारसी की एक नई शैली की रचना की जो सबक-ए-हिन्दी अर्थात हिन्दुस्तानी शैली के नाम से प्रसिद्ध हुई। इन्हें निजामुद्दीन औलिया ने तुर्वâल्लाह की उपाधि दी थी।