Correct Answer:
Option B - वाक्य को उस भाग को जिसमें एक से अधिक पद परस्पर सम्बद्ध होकर अर्थ तो देते है किन्तु पूरा अर्थ-नहीं देते है, उसे पदबन्ध कहते है।
⇒ पदबंध पाँच भेद है-
(1) संज्ञा पदबंध (2) विशेषण पदबंध (3) सर्वनाम पदबन्ध (4) क्रिया पदबंध (5) क्रिया विशेषण पदबंध।
⇒ मनुष्य के विचारों को पूर्णता से प्रकट करने वाले पदसमूह को वाक्य कहते है। वाक्य सार्थक शब्दों का व्यवस्थित रूप है।
⇒ उपवाक्य-ऐसा पदसमूह, जिसका अपना अर्थ हो, जो एक वाक्य का भाग हो और जिसमें उद्देश्य और विधेय हो, उपवाक्य कहलाता है।
⇒ उपवाक्य तीन प्रकार के होते हैं-
(1) संज्ञा उपवाक्य (2) विशेषण उपवाक्य (3) क्रिया विशेषण उपवाक्य
⇒ उपवक्यों के आरम्भ में अधिकतर कि, जिससे, ताकि, जो, जितना, ज्यो-ज्यों, चूँकि, क्योंकि, यदि, यद्यपि, जब, जहाँ इत्यादि होते है।
⇒ रचना की दृष्टि से वाक्य के तीन प्रकार है-
(1) सरल या साधारण वाक्य (2) मिश्र वाक्य (3) संयुक्त वाक्य
⇒ अर्थ की दृष्टि से वाक्य के आठ प्रकार होते हैं-
(1) विधिवाचक (2) निषेधवाचक (3) आज्ञावाचक (4) प्रश्नवाचक (5) विस्मयवाचक (6) संदेहवाचक (7) इच्छावाचक (8) संकेतवाचक
B. वाक्य को उस भाग को जिसमें एक से अधिक पद परस्पर सम्बद्ध होकर अर्थ तो देते है किन्तु पूरा अर्थ-नहीं देते है, उसे पदबन्ध कहते है।
⇒ पदबंध पाँच भेद है-
(1) संज्ञा पदबंध (2) विशेषण पदबंध (3) सर्वनाम पदबन्ध (4) क्रिया पदबंध (5) क्रिया विशेषण पदबंध।
⇒ मनुष्य के विचारों को पूर्णता से प्रकट करने वाले पदसमूह को वाक्य कहते है। वाक्य सार्थक शब्दों का व्यवस्थित रूप है।
⇒ उपवाक्य-ऐसा पदसमूह, जिसका अपना अर्थ हो, जो एक वाक्य का भाग हो और जिसमें उद्देश्य और विधेय हो, उपवाक्य कहलाता है।
⇒ उपवाक्य तीन प्रकार के होते हैं-
(1) संज्ञा उपवाक्य (2) विशेषण उपवाक्य (3) क्रिया विशेषण उपवाक्य
⇒ उपवक्यों के आरम्भ में अधिकतर कि, जिससे, ताकि, जो, जितना, ज्यो-ज्यों, चूँकि, क्योंकि, यदि, यद्यपि, जब, जहाँ इत्यादि होते है।
⇒ रचना की दृष्टि से वाक्य के तीन प्रकार है-
(1) सरल या साधारण वाक्य (2) मिश्र वाक्य (3) संयुक्त वाक्य
⇒ अर्थ की दृष्टि से वाक्य के आठ प्रकार होते हैं-
(1) विधिवाचक (2) निषेधवाचक (3) आज्ञावाचक (4) प्रश्नवाचक (5) विस्मयवाचक (6) संदेहवाचक (7) इच्छावाचक (8) संकेतवाचक