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Q: विकास का कौन-सा सिद्धान्त बताता है कि शरीर के विभिन्न तंत्र अलग-अलग दरोें पर विकसित होते हैं ?
  • A. शीर्षगामी सिद्धान्त
  • B. समीपदूराभिमुखी सिद्धान्त
  • C. पदानुक्रमित एकीकरण का सिद्धान्त
  • D. प्रणालियों की स्वतंत्रता का सिद्धान्त
Correct Answer: Option D - विकास का प्रणालियों की स्वतंत्रता का सिद्धान्त बताता है कि शरीर के विभिन्न तंत्र अलग-अलग दरों पर विकसित होते हैं। विभिन्न शरीर प्रणालियाँ अलग-अलग दरों पर परिपक्व होती हैं। उदाहरण के लिए, शैशवावस्था के दौरान तंत्रिका तंत्र अत्यधिक विकसित होता है। तंत्रिका तंत्र में मस्तिष्क और तंत्रिकाएँ शामिल हैं जो पूरे शरीर में फैली हुई हैं। इस सिद्धांत के अनुसार शरीर के आकार, तंत्रिका तंत्र और यौन परिपक्वता के लिए वृद्धि व विकास के पैटर्न काफी भिन्न होते हैं। अत: शरीर के विभिन्न तंत्रों का विकास अलग-अलग दर पर होता है।
D. विकास का प्रणालियों की स्वतंत्रता का सिद्धान्त बताता है कि शरीर के विभिन्न तंत्र अलग-अलग दरों पर विकसित होते हैं। विभिन्न शरीर प्रणालियाँ अलग-अलग दरों पर परिपक्व होती हैं। उदाहरण के लिए, शैशवावस्था के दौरान तंत्रिका तंत्र अत्यधिक विकसित होता है। तंत्रिका तंत्र में मस्तिष्क और तंत्रिकाएँ शामिल हैं जो पूरे शरीर में फैली हुई हैं। इस सिद्धांत के अनुसार शरीर के आकार, तंत्रिका तंत्र और यौन परिपक्वता के लिए वृद्धि व विकास के पैटर्न काफी भिन्न होते हैं। अत: शरीर के विभिन्न तंत्रों का विकास अलग-अलग दर पर होता है।

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विकास का प्रणालियों की स्वतंत्रता का सिद्धान्त बताता है कि शरीर के विभिन्न तंत्र अलग-अलग दरों पर विकसित होते हैं। विभिन्न शरीर प्रणालियाँ अलग-अलग दरों पर परिपक्व होती हैं। उदाहरण के लिए, शैशवावस्था के दौरान तंत्रिका तंत्र अत्यधिक विकसित होता है। तंत्रिका तंत्र में मस्तिष्क और तंत्रिकाएँ शामिल हैं जो पूरे शरीर में फैली हुई हैं। इस सिद्धांत के अनुसार शरीर के आकार, तंत्रिका तंत्र और यौन परिपक्वता के लिए वृद्धि व विकास के पैटर्न काफी भिन्न होते हैं। अत: शरीर के विभिन्न तंत्रों का विकास अलग-अलग दर पर होता है।