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Q: वाक्कौशलम् इति अस्य साहाय्येन सम्यग् वर्धते
  • A. स्थानापत्तिसारणि:
  • B. लिखित-संभाषणाभ्यास:
  • C. अभिनयो गोष्ठीचिन्तना च
  • D. समृद्धवाचनसामग्री
Correct Answer: Option C - अभिनव एवं गोष्ठी से वाणी की कुशलता में वृद्धि होती है। इससे बोलने की प्रवृत्ति के साथ-साथ शब्द ज्ञान में भी वृद्धि होती है। इससे व्यक्तिगत विकास होता है।
C. अभिनव एवं गोष्ठी से वाणी की कुशलता में वृद्धि होती है। इससे बोलने की प्रवृत्ति के साथ-साथ शब्द ज्ञान में भी वृद्धि होती है। इससे व्यक्तिगत विकास होता है।

Explanations:

अभिनव एवं गोष्ठी से वाणी की कुशलता में वृद्धि होती है। इससे बोलने की प्रवृत्ति के साथ-साथ शब्द ज्ञान में भी वृद्धि होती है। इससे व्यक्तिगत विकास होता है।