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Q: वंचित समूहों के विद्यार्थियों को सामान्य विद्यार्थियों के साथ–साथ पढ़ाना चाहिए। इसका अभिप्राय है
  • A. समावेशी शिक्षा
  • B. विशेष शिक्षा
  • C. एकीकृत शिक्षा
  • D. अपवर्जन शिक्षा
Correct Answer: Option A - समावेशी शिक्षा का आशय दिव्यांग विद्यार्थियों (जिन्हें आजकल विशिष्ट आवश्यकताओं वाले विद्यार्थी कहा जाता है) को सामान्य बच्चों के साथ बैठाकर सामान्य रूप से पढ़ाना है, ताकि सामान्य बच्चों और विशिष्ट आवश्यकताओं वाले बच्चों में कोई भेदभाव न रहे तथा दोनों प्रकार के विद्यार्थी एक दूसरे को ठीक ढंग से समझते हुए आपसी सहयोग से पठन–पाठन के कार्य को कर सके।
A. समावेशी शिक्षा का आशय दिव्यांग विद्यार्थियों (जिन्हें आजकल विशिष्ट आवश्यकताओं वाले विद्यार्थी कहा जाता है) को सामान्य बच्चों के साथ बैठाकर सामान्य रूप से पढ़ाना है, ताकि सामान्य बच्चों और विशिष्ट आवश्यकताओं वाले बच्चों में कोई भेदभाव न रहे तथा दोनों प्रकार के विद्यार्थी एक दूसरे को ठीक ढंग से समझते हुए आपसी सहयोग से पठन–पाठन के कार्य को कर सके।

Explanations:

समावेशी शिक्षा का आशय दिव्यांग विद्यार्थियों (जिन्हें आजकल विशिष्ट आवश्यकताओं वाले विद्यार्थी कहा जाता है) को सामान्य बच्चों के साथ बैठाकर सामान्य रूप से पढ़ाना है, ताकि सामान्य बच्चों और विशिष्ट आवश्यकताओं वाले बच्चों में कोई भेदभाव न रहे तथा दोनों प्रकार के विद्यार्थी एक दूसरे को ठीक ढंग से समझते हुए आपसी सहयोग से पठन–पाठन के कार्य को कर सके।