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Q: ‘‘वे धर्म में विशिष्टाद्वैतवादी, विचारों में गाँधीवादी और साहित्य में अभिधावादी है।’’ –यह कथन मैथिलीशरण गुप्त के विषय में किसने कहा है?
  • A. डॉ० गणपतिचन्द्र गुप्त
  • B. डॉ० हजारीप्रसाद द्विवेदी
  • C. डॉ० बच्चन सिंह
  • D. डॉ० रामचन्द्र शुक्ल
Correct Answer: Option C - ‘‘वे धर्म में विशिष्टाद्वैतवादी, विचारों में गाँधीवादी और साहित्य में अभिधावादी है।’’ –यह कथन मैथिलीशरण गुप्त के विषय में डॉ० बच्चन सिंह ने कहा है। मैथिलीशरण गुप्त को हिंदी साहित्य जगत में ‘‘दद्दा’’ नाम से सम्बोधित किया जाता था। उनकी कृति ‘भारत भारती’ (1912) के बाद महात्मा गांधी ने उन्हें ‘राष्ट्रकवि’ की पदवी भी दी। मैथिलीशरण गुप्त ने 12 वर्ष की अवस्था में ब्रजभाषा में ‘कनकलता’ नाम से प्रथम कविता लिखी।
C. ‘‘वे धर्म में विशिष्टाद्वैतवादी, विचारों में गाँधीवादी और साहित्य में अभिधावादी है।’’ –यह कथन मैथिलीशरण गुप्त के विषय में डॉ० बच्चन सिंह ने कहा है। मैथिलीशरण गुप्त को हिंदी साहित्य जगत में ‘‘दद्दा’’ नाम से सम्बोधित किया जाता था। उनकी कृति ‘भारत भारती’ (1912) के बाद महात्मा गांधी ने उन्हें ‘राष्ट्रकवि’ की पदवी भी दी। मैथिलीशरण गुप्त ने 12 वर्ष की अवस्था में ब्रजभाषा में ‘कनकलता’ नाम से प्रथम कविता लिखी।

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‘‘वे धर्म में विशिष्टाद्वैतवादी, विचारों में गाँधीवादी और साहित्य में अभिधावादी है।’’ –यह कथन मैथिलीशरण गुप्त के विषय में डॉ० बच्चन सिंह ने कहा है। मैथिलीशरण गुप्त को हिंदी साहित्य जगत में ‘‘दद्दा’’ नाम से सम्बोधित किया जाता था। उनकी कृति ‘भारत भारती’ (1912) के बाद महात्मा गांधी ने उन्हें ‘राष्ट्रकवि’ की पदवी भी दी। मैथिलीशरण गुप्त ने 12 वर्ष की अवस्था में ब्रजभाषा में ‘कनकलता’ नाम से प्रथम कविता लिखी।