Correct Answer:
Option A - ऊन की दूसरी परत कॉरटेक्स कहलाती है। यह प्राकृतिक जगत के प्राणिज समूह से प्राप्त होने वाला प्रोटीन युक्त रेशा है। इसमें केरेटीन नाम का प्रोटीन होता है। ऊन से वस्त्र बनाने का कार्य सर्वप्रथम इंग्लैण्ड में किया गया इसका रेशा टेढ़ा-मेढ़ा, छोर पर नुकीला एवं बहुकोशीय होता है। ऊन की तीन परतें होती हैं। पहली परत को क्यूटिकल (बाहरी) दूसरी परत कॉरटेक्स (मध्य) तीसरी परत मेड्यूला (आन्तरिक) होती है।
कॉरटेक्स में रंग वर्णक ‘मैलानिन’ उपस्थित होते है। इनसे रंग का निर्धारण होता है।
A. ऊन की दूसरी परत कॉरटेक्स कहलाती है। यह प्राकृतिक जगत के प्राणिज समूह से प्राप्त होने वाला प्रोटीन युक्त रेशा है। इसमें केरेटीन नाम का प्रोटीन होता है। ऊन से वस्त्र बनाने का कार्य सर्वप्रथम इंग्लैण्ड में किया गया इसका रेशा टेढ़ा-मेढ़ा, छोर पर नुकीला एवं बहुकोशीय होता है। ऊन की तीन परतें होती हैं। पहली परत को क्यूटिकल (बाहरी) दूसरी परत कॉरटेक्स (मध्य) तीसरी परत मेड्यूला (आन्तरिक) होती है।
कॉरटेक्स में रंग वर्णक ‘मैलानिन’ उपस्थित होते है। इनसे रंग का निर्धारण होता है।