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Q: `उत्तररामचरितम्' नाटक में तमसा और मुरला हैं –
  • A. वनदेवता
  • B. सीता की सखियाँ
  • C. नदी विशेषाधिष्ठात्री देवियाँ
  • D. इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - महाकवि भवभूति कृत उत्तररामचरितम् नाटक में तमसा और मुरला दोनों स्त्री पात्र हैं। ये दोनों नदी विशेषाधिष्ठात्री देवियाँ हैं। उत्तररामचरितम् के तृतीय अङ्क का प्रारम्भ तमसा एवं मुरला नामक दो नदियों के वार्तालाप से होता है। इसी अङ्क को छायाङ्क भी कहते हैं।
C. महाकवि भवभूति कृत उत्तररामचरितम् नाटक में तमसा और मुरला दोनों स्त्री पात्र हैं। ये दोनों नदी विशेषाधिष्ठात्री देवियाँ हैं। उत्तररामचरितम् के तृतीय अङ्क का प्रारम्भ तमसा एवं मुरला नामक दो नदियों के वार्तालाप से होता है। इसी अङ्क को छायाङ्क भी कहते हैं।

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महाकवि भवभूति कृत उत्तररामचरितम् नाटक में तमसा और मुरला दोनों स्त्री पात्र हैं। ये दोनों नदी विशेषाधिष्ठात्री देवियाँ हैं। उत्तररामचरितम् के तृतीय अङ्क का प्रारम्भ तमसा एवं मुरला नामक दो नदियों के वार्तालाप से होता है। इसी अङ्क को छायाङ्क भी कहते हैं।