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Q: उत्तररामचरित का प्रधान रस है-
  • A. शृङ्गार
  • B. शान्त
  • C. करुण
  • D. वीर
Correct Answer: Option C - ‘उत्तररामचरितम्’ नाटक का प्रधान रस करुण है। इस नाटक के तृतीय अङ्क के 47वें श्लोक में कहा गया है-‘‘एको रस: करुण एव’’ यह महाकवि भवभूति की रचना है।
C. ‘उत्तररामचरितम्’ नाटक का प्रधान रस करुण है। इस नाटक के तृतीय अङ्क के 47वें श्लोक में कहा गया है-‘‘एको रस: करुण एव’’ यह महाकवि भवभूति की रचना है।

Explanations:

‘उत्तररामचरितम्’ नाटक का प्रधान रस करुण है। इस नाटक के तृतीय अङ्क के 47वें श्लोक में कहा गया है-‘‘एको रस: करुण एव’’ यह महाकवि भवभूति की रचना है।