search
Q: उत्तराखण्ड के किस मेले में मछली मारने की परम्परा है?
  • A. मौण मेला
  • B. चैती मेला
  • C. गेंदी मेला
  • D. स्यालदे-बिखौती मेला
Correct Answer: Option A - उत्तराखण्ड के मौण मेले में मछली मारने की परम्परा है। मछली मारने का यह उत्सव विशेष रूप से जौनसार एवं खांई जौनसार के क्षेत्रों में मनाया जाता है। इसको मनाये जाने की तिथि जून महीने की 27 व 28 तारीख को पड़ती है। मौण का अर्थ है तिमूर के छिलकों को कूटकर तैयार किया गया वह पदार्थ जिसके मादक प्रभाव से मछलियाँ बेहोश हो जाती हैं। जौनसार (जौनपुर) में इसका आयोजन मसूरी-जमुनोत्री मार्ग पर अलगाड़ नदी के पुल के पास बंदरकोट के पास पटालूताल में किया जाता है।
A. उत्तराखण्ड के मौण मेले में मछली मारने की परम्परा है। मछली मारने का यह उत्सव विशेष रूप से जौनसार एवं खांई जौनसार के क्षेत्रों में मनाया जाता है। इसको मनाये जाने की तिथि जून महीने की 27 व 28 तारीख को पड़ती है। मौण का अर्थ है तिमूर के छिलकों को कूटकर तैयार किया गया वह पदार्थ जिसके मादक प्रभाव से मछलियाँ बेहोश हो जाती हैं। जौनसार (जौनपुर) में इसका आयोजन मसूरी-जमुनोत्री मार्ग पर अलगाड़ नदी के पुल के पास बंदरकोट के पास पटालूताल में किया जाता है।

Explanations:

उत्तराखण्ड के मौण मेले में मछली मारने की परम्परा है। मछली मारने का यह उत्सव विशेष रूप से जौनसार एवं खांई जौनसार के क्षेत्रों में मनाया जाता है। इसको मनाये जाने की तिथि जून महीने की 27 व 28 तारीख को पड़ती है। मौण का अर्थ है तिमूर के छिलकों को कूटकर तैयार किया गया वह पदार्थ जिसके मादक प्रभाव से मछलियाँ बेहोश हो जाती हैं। जौनसार (जौनपुर) में इसका आयोजन मसूरी-जमुनोत्री मार्ग पर अलगाड़ नदी के पुल के पास बंदरकोट के पास पटालूताल में किया जाता है।