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Q: उत्तराखण्ड के किस भाग में पाताल तोड़ कुएँ पाये जाते हैं?
  • A. भाभर में
  • B. तराई में
  • C. शिवालिक पहाडि़यों में
  • D. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - उत्तरांचल के तराई क्षेत्र में पाताल तोड़ कूप पाये जाते हैं। इन्हें पाताल तोड़ कुएँ भी कहते हैं। कंकरीली व पथरीली मिट्टी से निर्मित क्षेत्र को भाबर तथा महीन अवसादों वाली मिट्टी से निर्मित क्षेत्र को `तराई' के नाम से जाना जाता है। भाबर क्षेत्र के अन्तर्गत प्रमुख रूप से ऊधमसिंह नगर सम्मिलित है, जो एक संकरी पट्टी के रूप में हैं। इस क्षेत्र में पर्वतीय नदियों, नालों व स्रोतों का जल विस्तार रेतीली भूमि के नीचे अदृश्य हो जाता है। इस क्षेत्र में उपयुक्त मिट्टी होने के कारण चावल व गन्ना प्रमुख रूप से उत्पादित होता है।
B. उत्तरांचल के तराई क्षेत्र में पाताल तोड़ कूप पाये जाते हैं। इन्हें पाताल तोड़ कुएँ भी कहते हैं। कंकरीली व पथरीली मिट्टी से निर्मित क्षेत्र को भाबर तथा महीन अवसादों वाली मिट्टी से निर्मित क्षेत्र को `तराई' के नाम से जाना जाता है। भाबर क्षेत्र के अन्तर्गत प्रमुख रूप से ऊधमसिंह नगर सम्मिलित है, जो एक संकरी पट्टी के रूप में हैं। इस क्षेत्र में पर्वतीय नदियों, नालों व स्रोतों का जल विस्तार रेतीली भूमि के नीचे अदृश्य हो जाता है। इस क्षेत्र में उपयुक्त मिट्टी होने के कारण चावल व गन्ना प्रमुख रूप से उत्पादित होता है।

Explanations:

उत्तरांचल के तराई क्षेत्र में पाताल तोड़ कूप पाये जाते हैं। इन्हें पाताल तोड़ कुएँ भी कहते हैं। कंकरीली व पथरीली मिट्टी से निर्मित क्षेत्र को भाबर तथा महीन अवसादों वाली मिट्टी से निर्मित क्षेत्र को `तराई' के नाम से जाना जाता है। भाबर क्षेत्र के अन्तर्गत प्रमुख रूप से ऊधमसिंह नगर सम्मिलित है, जो एक संकरी पट्टी के रूप में हैं। इस क्षेत्र में पर्वतीय नदियों, नालों व स्रोतों का जल विस्तार रेतीली भूमि के नीचे अदृश्य हो जाता है। इस क्षेत्र में उपयुक्त मिट्टी होने के कारण चावल व गन्ना प्रमुख रूप से उत्पादित होता है।