निम्न प्रश्न में दो वक्तव्य हैं, एक को कथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है, इन वक्तव्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण कर इन प्रश्नों का उत्तर नीचे दिए कूट की सहायता से चुनिए— कथन (A) : लघु ज्वार-भाटाओं के समय उच्च ज्वार सामान्य से निम्नतर तथा निम्न ज्वार सामान्य से उच्चतर होता है। कारण (R) : लघु ज्वार भाटा वृहत ज्वार-भाटा के विपरीत पूर्ण चन्द्र के स्थान पर नव चन्द्र के समय होता है। कूट
A certain sum amounts to `280900 in 2 years at 6% per annum, interest compounded annually. The sum is:
If B = 100 day and D = 1400 hactares/cumec, then delta will be : यदि B = 100 दिन और D = 1400 hectares /cumec है, तो डेल्टा ज्ञात करें।
Which of the following example most appropriately represents the 'Speed' characteristic of the computer?
निम्नलिखित में से कौन सा औ़जार नटों और बोल्टों को शीघ्रता से ढीला करने और कसने के लिए श्रेष्ठ होता है?
In which year was Mahatma Gandhi to spend his time in Champaran, seeking to obtain for the peasant security of tenure as well as the freedom to cultivate the crops of their choice? महात्मा गांधी ने किस वर्ष चंपारण में अपना समय व्यतीत किया था, जिसमें किसानों के कार्यकाल की सुरक्षा के साथ-साथ अपनी पसंद की फसलों की खेती करने की स्वतंत्रता प्राप्त करने की मांग की गई थी?
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Who was the main drafter of Article 370?
निर्देश- प्रश्न संख्या (185 से 191) निम्नलिखितं गद्यांशं पठित्वा सप्तप्रश्नानां उत्तराणि समुचितं विकल्पं चित्वा दत्त– अस्ति कस्मिंश्चिद्वनोद्देशे मदोत्कटो नाम सिंह: प्रतिवसति स्म। तस्य च अनुचरा अन्य द्वीपिवायसगोमायव: सन्ति । अथ कदाचित् तै: इतस्ततो भ्रमद्भि: सार्थभ्रष्ट: क्रथनको नाम उष्टो दृष्ट:। अथ सिंह आह- ‘‘अहो! अपूर्वमिदं सत्त्वम् । तज्ज्ञायतां किमेतदारण्यकं ग्राम्यं वा’’ इति। तच्छ्रुत्वा वायस आह- ‘‘भो स्वामिन्! ग्राम्योऽयमुष्ट्रनामा जीवविशेषस्तव भोज्य:। तत् व्यापाद्यताम्। सिंह आह- ‘‘नाहं गृहमागतं हन्मि उक्तञ्च। तद्भय प्रदानं दत्त्वा मत्सकाशमानीयतां येन अस्यागमनकारणं पृच्छामि’’। अथ असौ सर्वैरपि विश्वासस्य अभयप्रदानं दत्त्वा मदोत्कटसकाशमानीत: प्रणम्योपविष्टश्च। ततस्तस्य पृच्छतस्तेनात्मवृत्तान्त: सार्थभ्रंशसमुद्भवो निवेदित:। तत: सिंहेनोक्तम् - ‘‘भो क्रथनक! मा त्वं ग्रामं गत्वा भूयोऽपि भारोदवहनकष्टभागी भूया:। तदत्रैव अरण्ये निर्विशज्रे मरकतसदृशानि शष्पाग्राणि भक्षयन् मया सह सदैव वस’’। सोऽपि तथेत्युक्त्वा तेषां मध्ये विचरन् न कुतोऽपि भयमिति सुखेन आस्ते। तथान्येद्युर्मदोत्कटस्य महागजेन अरण्यचारिणा सह युद्धमभवत् । ततस्तस्य दन्तमुशलप्रहारैव्यर्था सञ्जाता। व्यथित: कथमपि प्राणैर्न वियुक्त:। अथ शरीरसामर्थ्यात न कुत्रचित्पदमपि चलितुं शक्नोति तेऽपि सर्वे काकादयोऽप्रभुत्वेन क्षुधाविष्टा: परं दु:खं भेजु: अथ तान् सिंह: प्राह- ‘‘भो! अन्विष्यतां कुत्रचित् किञ्चित् सत्त्वं येन अहं एतामपि दशां प्राप्तस्तद्धत्वा युष्मद्भोजनं सम्पादयामि’’। अथ ते चत्वारोऽपि भ्रमितुमारब्धा यावन्न किञ्चित् सत्त्वं पश्यन्ति तावद्वायसशृगालौ परस्परं मन्त्रयत:। शृगाल आह - ‘‘भो वायस! किं प्रभूतभ्रान्तेन, अयमस्माकं प्रभो: क्रथनको विश्वस्तस्तिष्ठति तदेनं हत्वा प्राणयात्रां कुर्म:। वायस आह- ‘‘युक्तमुक्तं भवता, परं स्वामिना तस्य अभयप्रदानं दत्तमास्ते न वध्योऽयम्’’ इति। वायसशृगालौ अस्मिन पदे क: समास: ?
बच्चा किस उम्र में सीढि़याँ चढ़ना शुरू करता है?
Explanations:
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