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Q: उत्तर प्रदेश के किस जिले में ‘बुक्सा जनजाति’ पायी जाती है?
  • A. बिजनौर और आगरा
  • B. बहराइच और लखीमपुर
  • C. मिर्जापुर और सोनभद्र
  • D. ललितपुर और जालौन
Correct Answer: Option A - बुक्सा/भोक्ष जनजाति उत्तर प्रदेश के बिजनौर व आगरा जिले में पायी जाती है। इस जनजाति के लोगों का कद और आँखे छोटी होती हैें तथा उनकी पलवेंâ भारी, चेहरा चौड़ा एवं नाक चपटी होती है। ये लोग मुख्यत: हिंदी भाषा बोलते हैं तथा इनका मुख्य भोजन मछली और चावल है। इस जनजाति के लोगों की पारम्परिक वेशभूषा में धोती, कुर्ता, सदरी और सिर पर पगड़ी मुख्य पहनावा है तथा महिलाओं के पारम्परिक पहनावें में लाल, नीले या काले रंग का छीट लंहगा चोली (अंगिया) और उसके साथ ओढ़नी मुख्य है। ध्यातव्य है कि ये महिलाएँ राजस्थानी मेवाड़ी राजपूतों के समान सिर पर ‘इडरी’ के द्वारा ऊँचा जूड़ा बाँधती हैं।
A. बुक्सा/भोक्ष जनजाति उत्तर प्रदेश के बिजनौर व आगरा जिले में पायी जाती है। इस जनजाति के लोगों का कद और आँखे छोटी होती हैें तथा उनकी पलवेंâ भारी, चेहरा चौड़ा एवं नाक चपटी होती है। ये लोग मुख्यत: हिंदी भाषा बोलते हैं तथा इनका मुख्य भोजन मछली और चावल है। इस जनजाति के लोगों की पारम्परिक वेशभूषा में धोती, कुर्ता, सदरी और सिर पर पगड़ी मुख्य पहनावा है तथा महिलाओं के पारम्परिक पहनावें में लाल, नीले या काले रंग का छीट लंहगा चोली (अंगिया) और उसके साथ ओढ़नी मुख्य है। ध्यातव्य है कि ये महिलाएँ राजस्थानी मेवाड़ी राजपूतों के समान सिर पर ‘इडरी’ के द्वारा ऊँचा जूड़ा बाँधती हैं।

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बुक्सा/भोक्ष जनजाति उत्तर प्रदेश के बिजनौर व आगरा जिले में पायी जाती है। इस जनजाति के लोगों का कद और आँखे छोटी होती हैें तथा उनकी पलवेंâ भारी, चेहरा चौड़ा एवं नाक चपटी होती है। ये लोग मुख्यत: हिंदी भाषा बोलते हैं तथा इनका मुख्य भोजन मछली और चावल है। इस जनजाति के लोगों की पारम्परिक वेशभूषा में धोती, कुर्ता, सदरी और सिर पर पगड़ी मुख्य पहनावा है तथा महिलाओं के पारम्परिक पहनावें में लाल, नीले या काले रंग का छीट लंहगा चोली (अंगिया) और उसके साथ ओढ़नी मुख्य है। ध्यातव्य है कि ये महिलाएँ राजस्थानी मेवाड़ी राजपूतों के समान सिर पर ‘इडरी’ के द्वारा ऊँचा जूड़ा बाँधती हैं।