Correct Answer:
Option C - भारत में उच्च शिक्षा पर 1948 में एक आयोग की नियुक्ति की गई। जिसका नाम ‘विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग’ था और इस आयोग की अध्यक्षता ‘डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन’ द्वारा किया गया। इस आयोग के अन्य सदस्यों में डॉक्टर ताराचंद, डॉक्टर जाकिर हुसैन, डॉक्टर लक्ष्मणस्वामी मुदालियर, डॉक्टर मेघनाथ साहा जैसे- दिग्गज विद्वान सदस्य भी सम्मिलित किए गए थे। जबकि इस आयोग में दो अमेरिकी विद्वान थे। विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने तत्परता से अपने कार्यों को शिक्षा के क्षेत्र में समाप्त कर 1949 में अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जिसमें निम्नांकित सिफारिशें थी-
1. शिक्षा द्वारा राजनीति, शासन, व्यवसाय, व्यापार आदि क्षेत्रों में नेतृत्व करने वाले छात्र तैयार होंगे।
2. विश्वविद्यालय संस्कृति के मूल्यांकन एवं पुन:संगठन, समानता, स्वतंत्रता एवं न्याय पर आधारित नए समाज की रचना में योगदान कर सके।
3. विश्वविद्यालय पूर्व मानसिक विकास पर बल दे सके।
4. विश्वविद्यालय में छात्रों में उच्चतम मूल्यों में विश्वास निर्माण कर सके।
5. विश्वविद्यालय का काम छात्रों को आत्म ज्ञान देना होगा।
6. देश की सांस्कृतिक एकता राष्ट्रीयता एवं विश्व बंधुत्व में विश्वास आदि गुणों पर चर्चा एवं उसका विकास करेंगें।
C. भारत में उच्च शिक्षा पर 1948 में एक आयोग की नियुक्ति की गई। जिसका नाम ‘विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग’ था और इस आयोग की अध्यक्षता ‘डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन’ द्वारा किया गया। इस आयोग के अन्य सदस्यों में डॉक्टर ताराचंद, डॉक्टर जाकिर हुसैन, डॉक्टर लक्ष्मणस्वामी मुदालियर, डॉक्टर मेघनाथ साहा जैसे- दिग्गज विद्वान सदस्य भी सम्मिलित किए गए थे। जबकि इस आयोग में दो अमेरिकी विद्वान थे। विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने तत्परता से अपने कार्यों को शिक्षा के क्षेत्र में समाप्त कर 1949 में अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जिसमें निम्नांकित सिफारिशें थी-
1. शिक्षा द्वारा राजनीति, शासन, व्यवसाय, व्यापार आदि क्षेत्रों में नेतृत्व करने वाले छात्र तैयार होंगे।
2. विश्वविद्यालय संस्कृति के मूल्यांकन एवं पुन:संगठन, समानता, स्वतंत्रता एवं न्याय पर आधारित नए समाज की रचना में योगदान कर सके।
3. विश्वविद्यालय पूर्व मानसिक विकास पर बल दे सके।
4. विश्वविद्यालय में छात्रों में उच्चतम मूल्यों में विश्वास निर्माण कर सके।
5. विश्वविद्यालय का काम छात्रों को आत्म ज्ञान देना होगा।
6. देश की सांस्कृतिक एकता राष्ट्रीयता एवं विश्व बंधुत्व में विश्वास आदि गुणों पर चर्चा एवं उसका विकास करेंगें।