Correct Answer:
Option B - बरचन टीले अर्द्धचंद्राकार होते है, इसलिए इन्हें अर्द्धचंद्राकार टीले भी कहा जाता है। वे वहीं बनते है जहाँ स्थितियाँ आदर्श होती हैं। उन्हें समतल परिदृश्य, केवल एक दिशा से आने वाली हवाएँ और सीमित रेत की आवश्यकता होती है।
B. बरचन टीले अर्द्धचंद्राकार होते है, इसलिए इन्हें अर्द्धचंद्राकार टीले भी कहा जाता है। वे वहीं बनते है जहाँ स्थितियाँ आदर्श होती हैं। उन्हें समतल परिदृश्य, केवल एक दिशा से आने वाली हवाएँ और सीमित रेत की आवश्यकता होती है।