search
Q: उत्तमजना: किं न परित्यजन्ति? (भर्तृहरिमतानुसारम्)
  • A. अध्ययनम्
  • B. धनार्जनम्
  • C. प्रारब्धं कार्यम्
  • D. देवार्चनम्
Correct Answer: Option C - उत्तमजना: प्रारब्धं कार्यम् न परित्यजन्ति। विघ्नैर्मुहुर्मुहरपि प्रतिहन्यमाना: ‘प्रारब्धमुत्तम जना न परित्यजन्ति। अर्थात् उत्तम वर्ग के मनुष्य विघ्नों के बार-बार आघात करने पर भी अपने शुरू किये गये काम को नहीं छोड़ते अधम पुरुष-प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचै: अर्थात् अधम पुरुष विघ्न के भय से कार्य शुरू नहीं करते। मध्यम पुरुष-प्रारभ्य विघ्न विहिता विरमन्ति मध्या: अर्थात् मध्यम पुरुष कार्यों को शुरू करते हैं लेकिन विघ्न के आने पर कार्य को छोड़ देते हैं।
C. उत्तमजना: प्रारब्धं कार्यम् न परित्यजन्ति। विघ्नैर्मुहुर्मुहरपि प्रतिहन्यमाना: ‘प्रारब्धमुत्तम जना न परित्यजन्ति। अर्थात् उत्तम वर्ग के मनुष्य विघ्नों के बार-बार आघात करने पर भी अपने शुरू किये गये काम को नहीं छोड़ते अधम पुरुष-प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचै: अर्थात् अधम पुरुष विघ्न के भय से कार्य शुरू नहीं करते। मध्यम पुरुष-प्रारभ्य विघ्न विहिता विरमन्ति मध्या: अर्थात् मध्यम पुरुष कार्यों को शुरू करते हैं लेकिन विघ्न के आने पर कार्य को छोड़ देते हैं।

Explanations:

उत्तमजना: प्रारब्धं कार्यम् न परित्यजन्ति। विघ्नैर्मुहुर्मुहरपि प्रतिहन्यमाना: ‘प्रारब्धमुत्तम जना न परित्यजन्ति। अर्थात् उत्तम वर्ग के मनुष्य विघ्नों के बार-बार आघात करने पर भी अपने शुरू किये गये काम को नहीं छोड़ते अधम पुरुष-प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचै: अर्थात् अधम पुरुष विघ्न के भय से कार्य शुरू नहीं करते। मध्यम पुरुष-प्रारभ्य विघ्न विहिता विरमन्ति मध्या: अर्थात् मध्यम पुरुष कार्यों को शुरू करते हैं लेकिन विघ्न के आने पर कार्य को छोड़ देते हैं।