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With reference to the period of development, which of the following statements is correct? विकास की अवधि के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है? I. Piaget describes the anal and phallic stages of infancy and the oedipal stage of early childhood. I. पियाजे शैशवावस्था की गुदा और फालिक अवस्थाओं और प्रारंभिक बचपन की इडिपस (Oedipal) अवस्था का वर्णन करता है। Vygotsky has characterized a series of stages such as association as the infancy period and learning as the middle childhood period. II वायगोत्स्की ने शैशवावस्था अवधि के रूप में संबद्धता और मध्य बचपन अवधि के रूप में अधिगम जैसी अवस्थाओं की एक शृंखला अभिलक्षित की है।
शिवराजविजयस्य रचनाकार: विद्यते–
Vitamin A is necessary for the synthesis of - के संश्लेषण के लिए विटामिन- A आवश्यक है।
D is point on the side BC of a ∆ABC such that ∠ADC = ∠BAC. If CA = 10cm and BC = 16cm, then the length of CD is:
माइक्रोप्रोसेसर 3 MHz दोलित्र का प्रयोग करता है। एक T अवस्था की अवधि होती है:
Which of the following is a brackish water resource?
अन्त: क्षेपण में अन्दर आने वाली वायु का आकलन किस सेन्सर द्वारा किया जाता है?
What is the latitudinal spread of the state of Madhya Pradesh? मध्य प्रदेश राज्य के अक्षांश का विस्तार क्या है?
निर्देश (81-83) : दिये गए निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए। उपर्युक्त गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उपयुक्त शीर्षक का चयन कीजिए: आनंद और खुशी की खोज में हम सारा जीवन लगे रहते हैं। बाह्य शिष्टाचारों से खुशी तो प्राप्त होती है किन्तु वह क्षणिक होती है। आत्मिक खुशी तो हमें अपने अन्दर ही तलाशनी होती है। हमारे अंत:करण में आनंद का सरोवर और खुशी का खजाना सदैव विद्यमान रहता है। ये यादों और अनुभूतियों का वह भंडार घर है, जहाँ हमारा अंत:करण आज तक की सभी यादों और अनुभूतियों को संगृहीत करके रखता है। यह बहुत बुद्धिमान और चतुर है। यह आपका आज्ञाकारी दास भी हैं इसके विशाल संग्रह में से आत्मिक आनंद को प्राप्त करना है तो इसे उसी दिशा में निर्देशित करना होगा। बाह्य मन को कुछ देर के लिए शांत, स्थिर और गतिहीन कीजिए और अन्तर्मन को निर्देश दीजिये कि वह अपने संग्रह में से नकारात्मक यादों-अनुभूतियों को मिटा कर आपके लिए आनंद के अनमोल सच्चे मोती निकाल कर लाये। निरंतर अपने अंत:करण को यही आज्ञा देते रहिये और धीरे-धीरे वह कब आपको आत्मिक आनन्द और जीवन-स्फुर्ति से सराबोर कर देगा, आपको पता भी नहीं चलेगा।
Explanations:
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