Correct Answer:
Option C - • के.जी. सुब्रमण्यन चित्रकार, मूर्तिकार, भित्तिचित्रकार, छापाकार, प्रिंटमेकर, तथा लेखक थे।
• 1944 ई. में के.जी. सुब्रमण्यम शांतिनिकेतन के कला भवन से नंदलाल बोस, विनोद बिहारी मुखर्जी, रामविंâकर बैज के सानिध्य में कला शिक्षा ग्रहण किया।
• शैली की विविधता, मौलिकता और सर्जनात्मकता के.जी. की कला की प्रमुख विशेषताएँ है। इन्हे भित्ति-चित्र तथा टैक्सटाइल्स में द्वि-आयामी डिजाइन बनाने में भी कमाल की महारत हासिल थी। वे चिकने धरातलों वाले अलंकरणों के ऊपर सुलिपि का अंकन करते थे।
प्रसिद्ध भित्ति चित्र– ज्योति लिमिटेड बड़ौदा, रवीन्द्रालय लखनऊ, भारतीय मंडप-न्यूयार्क विश्व मेले, ललित कला संकाय बड़ौदा, मेरे सपनों का भारत मंडप, गांधी दर्शन नई दिल्ली आदि।
प्रसिद्ध चित्र– बच्चा जन्मती, दूध पिलाती, बागवानी करती, अखबार पढ़ती आदि।
C. • के.जी. सुब्रमण्यन चित्रकार, मूर्तिकार, भित्तिचित्रकार, छापाकार, प्रिंटमेकर, तथा लेखक थे।
• 1944 ई. में के.जी. सुब्रमण्यम शांतिनिकेतन के कला भवन से नंदलाल बोस, विनोद बिहारी मुखर्जी, रामविंâकर बैज के सानिध्य में कला शिक्षा ग्रहण किया।
• शैली की विविधता, मौलिकता और सर्जनात्मकता के.जी. की कला की प्रमुख विशेषताएँ है। इन्हे भित्ति-चित्र तथा टैक्सटाइल्स में द्वि-आयामी डिजाइन बनाने में भी कमाल की महारत हासिल थी। वे चिकने धरातलों वाले अलंकरणों के ऊपर सुलिपि का अंकन करते थे।
प्रसिद्ध भित्ति चित्र– ज्योति लिमिटेड बड़ौदा, रवीन्द्रालय लखनऊ, भारतीय मंडप-न्यूयार्क विश्व मेले, ललित कला संकाय बड़ौदा, मेरे सपनों का भारत मंडप, गांधी दर्शन नई दिल्ली आदि।
प्रसिद्ध चित्र– बच्चा जन्मती, दूध पिलाती, बागवानी करती, अखबार पढ़ती आदि।