Correct Answer:
Option B - उर्दू को ‘यामिनी भाषा’ कहने का श्रेय ‘लल्लू लाल’ को है। ‘प्रेमसागर’ की रचना करते वक्त इन्होंने ‘यामिनी भाषा’ छोड़ने का संकेत किया था। आगरा निवासी गुजराती ब्राह्मण लल्लू लाल को हिन्दी गद्य के प्रमुख स्तम्भों में से एक माना जाता है। इनका जन्म आगरा में 1763 ई. में हुआ था।
इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं-
सिंहासन बत्तीसी, बैताल पचीसी, प्रेमसागर, शकुन्तला, माधवानल, ब्रजभाषा व्याकरण आदि।
B. उर्दू को ‘यामिनी भाषा’ कहने का श्रेय ‘लल्लू लाल’ को है। ‘प्रेमसागर’ की रचना करते वक्त इन्होंने ‘यामिनी भाषा’ छोड़ने का संकेत किया था। आगरा निवासी गुजराती ब्राह्मण लल्लू लाल को हिन्दी गद्य के प्रमुख स्तम्भों में से एक माना जाता है। इनका जन्म आगरा में 1763 ई. में हुआ था।
इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं-
सिंहासन बत्तीसी, बैताल पचीसी, प्रेमसागर, शकुन्तला, माधवानल, ब्रजभाषा व्याकरण आदि।