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Q: Under the Constitution of India, which one of the following is not a fundamental duty? भारत के संविधान के अन्तर्गत निम्नलिखित में से कौन-सा एक मूल कर्तव्य नहीं है?
  • A. To vote in public elections लोक निर्वाचन में मतदान करना
  • B. To develop the scientific temper वैज्ञानिक मनोभाव का विकास करना
  • C. To safeguard public property सार्वजनिक सम्पत्ति की सुरक्षा करना
  • D. To abide by the Constitution and respect its ideals / संविधान से आबद्ध रहना और इसके आदर्शों का सम्मान करना
Correct Answer: Option A - लोक निर्वाचन में मतदान करना भारतीय संविधान के अंतर्गत एक मूल कत्र्तव्य नहीं है। उल्लेखनीय है कि मूल संविधान में मौलिक कत्र्तव्यों का समावेश नहीं किया गया था। सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा संविधान में भाग-4क और अनुच्छेद 51(क) को जोड़कर कुल 10 मौलिक कर्त्तव्यों को शामिल किया गया। इसे पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया था। 86वें संविधान संशोधन अधिनियम (2002) द्वारा 11वें कर्त्तव्य के रूप में 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करने का कर्त्तव्य बच्चों के माता-पिता या संरक्षक पर आरोपित किया गया है।
A. लोक निर्वाचन में मतदान करना भारतीय संविधान के अंतर्गत एक मूल कत्र्तव्य नहीं है। उल्लेखनीय है कि मूल संविधान में मौलिक कत्र्तव्यों का समावेश नहीं किया गया था। सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा संविधान में भाग-4क और अनुच्छेद 51(क) को जोड़कर कुल 10 मौलिक कर्त्तव्यों को शामिल किया गया। इसे पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया था। 86वें संविधान संशोधन अधिनियम (2002) द्वारा 11वें कर्त्तव्य के रूप में 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करने का कर्त्तव्य बच्चों के माता-पिता या संरक्षक पर आरोपित किया गया है।

Explanations:

लोक निर्वाचन में मतदान करना भारतीय संविधान के अंतर्गत एक मूल कत्र्तव्य नहीं है। उल्लेखनीय है कि मूल संविधान में मौलिक कत्र्तव्यों का समावेश नहीं किया गया था। सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा संविधान में भाग-4क और अनुच्छेद 51(क) को जोड़कर कुल 10 मौलिक कर्त्तव्यों को शामिल किया गया। इसे पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया था। 86वें संविधान संशोधन अधिनियम (2002) द्वारा 11वें कर्त्तव्य के रूप में 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करने का कर्त्तव्य बच्चों के माता-पिता या संरक्षक पर आरोपित किया गया है।