Correct Answer:
Option B - प्रिज्मी दिकसूचक से दिक्मान पूर्णवृत्त दिक्मान प्रणाली में पढ़ा जाता है। इसमें लक्ष्य वेधन तथा चक्री पठन एक साथ ही सम्पन्न होते है और सर्वेक्षक को अपनी स्थिति बदलनी नहीं पड़ती है। प्रिज्मी दिक्सूचक में चुम्बकीय सुई चौड़ी पट्टी (Broad Needle) की बनी होती है किन्तु यह संकेतक का काम नहीं करती है। प्रिज्मी दिक्सूचक में अंशांकित चक्री बक्से से न जुड़ी होकर सुई (Needle) के साथ जुड़ी रहती है। जबकि सर्वेक्षक दिक्सूचक में अंशाकित चक्री दिक्सूचक के बक्से के साथ स्थायी रूप से जुड़ी रहती है और बेधिकाओं के साथ घूमती है।
B. प्रिज्मी दिकसूचक से दिक्मान पूर्णवृत्त दिक्मान प्रणाली में पढ़ा जाता है। इसमें लक्ष्य वेधन तथा चक्री पठन एक साथ ही सम्पन्न होते है और सर्वेक्षक को अपनी स्थिति बदलनी नहीं पड़ती है। प्रिज्मी दिक्सूचक में चुम्बकीय सुई चौड़ी पट्टी (Broad Needle) की बनी होती है किन्तु यह संकेतक का काम नहीं करती है। प्रिज्मी दिक्सूचक में अंशांकित चक्री बक्से से न जुड़ी होकर सुई (Needle) के साथ जुड़ी रहती है। जबकि सर्वेक्षक दिक्सूचक में अंशाकित चक्री दिक्सूचक के बक्से के साथ स्थायी रूप से जुड़ी रहती है और बेधिकाओं के साथ घूमती है।