Correct Answer:
Option C - लार्ड कैनिंग का शासनकाल 1856 से लेकर के 1862 तक था। उसी के समय में 1856 में विधवा-पुर्निववाह अधिनियम पारित किया गया था। विधवा पुर्निववाह की स्थित में सुधार लाने के लिए ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने अथक प्रयत्न किया। 1855 में विद्यासागर ने ब्रिटिश सरकार से विधवा पुर्निववाह पर कानून बनाने का अनुरोध किया। 26 जुलाई, 1856 के `विधवा पुर्निववाह अधिनियम' द्वारा विधवा विवाह को वैध करार देते हुए इनसे पैदा होने वाले बच्चों को वैध माना गया।
C. लार्ड कैनिंग का शासनकाल 1856 से लेकर के 1862 तक था। उसी के समय में 1856 में विधवा-पुर्निववाह अधिनियम पारित किया गया था। विधवा पुर्निववाह की स्थित में सुधार लाने के लिए ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने अथक प्रयत्न किया। 1855 में विद्यासागर ने ब्रिटिश सरकार से विधवा पुर्निववाह पर कानून बनाने का अनुरोध किया। 26 जुलाई, 1856 के `विधवा पुर्निववाह अधिनियम' द्वारा विधवा विवाह को वैध करार देते हुए इनसे पैदा होने वाले बच्चों को वैध माना गया।