Correct Answer:
Option A - ध्वनिपरिवर्तनस्य ‘मुखसुखम्’ आभ्यन्तरकारणमस्तिा अर्थात् ध्वनि परिवर्तन का ‘मुखसुख’ आभ्यन्तर कारण है। ध्वनि का परिवर्तन दो कारणों से होता है।
(1) बाह्य कारण (2) आभ्यन्तर कारण
(1) ध्वनि परिवर्तन के बाह्य कारण - ये कारण बाहर से ध्वनि को प्रभावित करते हैं। ध्वनि परिवर्तन के बाह्य कारण मुख्यत: हैं-
(a) व्यक्तिगत भिन्नता
(b) भौगोलिक कारण
(c) सामाजिक परिस्थिति
(d) अन्य भाषाओं का प्रभाव
(2) ध्वनि परिवर्तन के आभ्यन्तर कारण- ध्वनि-परिवर्तन के सम्बन्ध में वक्ता और श्रोता से सम्बन्धित कारणों को आभ्यन्तर या आन्तरिक कारण कहते हैं। इस वर्ग के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं-
(a) मुख-सुख (b) भावावेष
(c) अशिक्षा (d) बोलने में शीघ्रता
(e) बलाघात (f) कलागत स्वातंत्रय
(g) अनुकरण की अपूर्णता (h) सहजीकरण
(i) लिपि-दोष
A. ध्वनिपरिवर्तनस्य ‘मुखसुखम्’ आभ्यन्तरकारणमस्तिा अर्थात् ध्वनि परिवर्तन का ‘मुखसुख’ आभ्यन्तर कारण है। ध्वनि का परिवर्तन दो कारणों से होता है।
(1) बाह्य कारण (2) आभ्यन्तर कारण
(1) ध्वनि परिवर्तन के बाह्य कारण - ये कारण बाहर से ध्वनि को प्रभावित करते हैं। ध्वनि परिवर्तन के बाह्य कारण मुख्यत: हैं-
(a) व्यक्तिगत भिन्नता
(b) भौगोलिक कारण
(c) सामाजिक परिस्थिति
(d) अन्य भाषाओं का प्रभाव
(2) ध्वनि परिवर्तन के आभ्यन्तर कारण- ध्वनि-परिवर्तन के सम्बन्ध में वक्ता और श्रोता से सम्बन्धित कारणों को आभ्यन्तर या आन्तरिक कारण कहते हैं। इस वर्ग के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं-
(a) मुख-सुख (b) भावावेष
(c) अशिक्षा (d) बोलने में शीघ्रता
(e) बलाघात (f) कलागत स्वातंत्रय
(g) अनुकरण की अपूर्णता (h) सहजीकरण
(i) लिपि-दोष