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Q: .
  • A. केवल A,B
  • B. केवल A,B, C
  • C. केवल C, D
  • D. केवल A, D. E
Correct Answer: Option A - दिए गए वक्तव्यों में से गैंग्रीन कहानी से संबंधित वक्तव्य हैं- • ‘मालती एक पंखा उठा लाई और मुझे हवा करने लगी। मैंने आपत्ति करते हुए कहा, ‘‘नहीं मुझे नहीं चाहिए।’’ • महेश्वर खाना आरम्भ करते हुए मेरी ओर देखकर बोले - आपको तो खाने का मजा क्या ही आएगा, ऐसे बेवक्त खा रहे हैं जबकि शेष अन्य कथन असंगत हैं। • गैंग्रीन कहानी के कहानीकार ‘अज्ञेय’ हैं। बाद में यह कहानी ‘रोज’ शीर्षक से छपी थी। अज्ञेंय की अन्य कहानियाँ - मेजर चौधरी, कविप्रिया, रमन्ते तत्र देवता, नारंगियाँ, मनसो, पठार का धीरज, पुरुष का भाग्य इत्यादि हैं। अज्ञेय के कहानी संग्रह इस प्रकार हैं- विपथगा (1937), परम्परा (1940), कोठरी की बात (1945), शरणार्थी (1948), जयदोल (1951), ये तेरे प्रतिरूप (1961), अमर वल्लरी (1945)।
A. दिए गए वक्तव्यों में से गैंग्रीन कहानी से संबंधित वक्तव्य हैं- • ‘मालती एक पंखा उठा लाई और मुझे हवा करने लगी। मैंने आपत्ति करते हुए कहा, ‘‘नहीं मुझे नहीं चाहिए।’’ • महेश्वर खाना आरम्भ करते हुए मेरी ओर देखकर बोले - आपको तो खाने का मजा क्या ही आएगा, ऐसे बेवक्त खा रहे हैं जबकि शेष अन्य कथन असंगत हैं। • गैंग्रीन कहानी के कहानीकार ‘अज्ञेय’ हैं। बाद में यह कहानी ‘रोज’ शीर्षक से छपी थी। अज्ञेंय की अन्य कहानियाँ - मेजर चौधरी, कविप्रिया, रमन्ते तत्र देवता, नारंगियाँ, मनसो, पठार का धीरज, पुरुष का भाग्य इत्यादि हैं। अज्ञेय के कहानी संग्रह इस प्रकार हैं- विपथगा (1937), परम्परा (1940), कोठरी की बात (1945), शरणार्थी (1948), जयदोल (1951), ये तेरे प्रतिरूप (1961), अमर वल्लरी (1945)।

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दिए गए वक्तव्यों में से गैंग्रीन कहानी से संबंधित वक्तव्य हैं- • ‘मालती एक पंखा उठा लाई और मुझे हवा करने लगी। मैंने आपत्ति करते हुए कहा, ‘‘नहीं मुझे नहीं चाहिए।’’ • महेश्वर खाना आरम्भ करते हुए मेरी ओर देखकर बोले - आपको तो खाने का मजा क्या ही आएगा, ऐसे बेवक्त खा रहे हैं जबकि शेष अन्य कथन असंगत हैं। • गैंग्रीन कहानी के कहानीकार ‘अज्ञेय’ हैं। बाद में यह कहानी ‘रोज’ शीर्षक से छपी थी। अज्ञेंय की अन्य कहानियाँ - मेजर चौधरी, कविप्रिया, रमन्ते तत्र देवता, नारंगियाँ, मनसो, पठार का धीरज, पुरुष का भाग्य इत्यादि हैं। अज्ञेय के कहानी संग्रह इस प्रकार हैं- विपथगा (1937), परम्परा (1940), कोठरी की बात (1945), शरणार्थी (1948), जयदोल (1951), ये तेरे प्रतिरूप (1961), अमर वल्लरी (1945)।