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Q: The tem 'Hiranyastupa' was mentioned firstly in : ‘हिरण्यस्तूप’ शब्द का उल्लेख सर्वप्रथम हुआ था–
  • A. Vinaya Pitaka/विनय पिटक
  • B. Digha Nikaya/दीघ निकाय
  • C. Divyavadana/दिव्यवदान
  • D. Rigveda/ऋग्वेद
Correct Answer: Option D - स्तूप का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है जहाँ इसे हिरण्यस्तूप कहा गया है। स्तूप का शाब्दिक अर्थ ‘ढेर’ या ‘थूहा’ होता है। चूँकि यह चिता के स्थान पर बनाया जाता है अत: इसका एक नाम ‘चैत्य’ भी है। स्तूप के 4 प्रकार पारिभौमिक, शारीरिक, उद्देशिक और संकल्पित होते है। पारिभौमिक में बुद्ध द्वारा उपयोग में लाई गई वस्तुओं पर, शारीरिक में बुद्ध व उनके प्रमुख शिष्यों के अस्थियों पर, उद्देशिका में बुद्ध के जीवन की घटनाओं पर तथा संकल्पित में श्रद्धालुओं द्वारा स्तूप का निर्माण कराया जाता है।
D. स्तूप का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है जहाँ इसे हिरण्यस्तूप कहा गया है। स्तूप का शाब्दिक अर्थ ‘ढेर’ या ‘थूहा’ होता है। चूँकि यह चिता के स्थान पर बनाया जाता है अत: इसका एक नाम ‘चैत्य’ भी है। स्तूप के 4 प्रकार पारिभौमिक, शारीरिक, उद्देशिक और संकल्पित होते है। पारिभौमिक में बुद्ध द्वारा उपयोग में लाई गई वस्तुओं पर, शारीरिक में बुद्ध व उनके प्रमुख शिष्यों के अस्थियों पर, उद्देशिका में बुद्ध के जीवन की घटनाओं पर तथा संकल्पित में श्रद्धालुओं द्वारा स्तूप का निर्माण कराया जाता है।

Explanations:

स्तूप का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है जहाँ इसे हिरण्यस्तूप कहा गया है। स्तूप का शाब्दिक अर्थ ‘ढेर’ या ‘थूहा’ होता है। चूँकि यह चिता के स्थान पर बनाया जाता है अत: इसका एक नाम ‘चैत्य’ भी है। स्तूप के 4 प्रकार पारिभौमिक, शारीरिक, उद्देशिक और संकल्पित होते है। पारिभौमिक में बुद्ध द्वारा उपयोग में लाई गई वस्तुओं पर, शारीरिक में बुद्ध व उनके प्रमुख शिष्यों के अस्थियों पर, उद्देशिका में बुद्ध के जीवन की घटनाओं पर तथा संकल्पित में श्रद्धालुओं द्वारा स्तूप का निर्माण कराया जाता है।